रेत, कोयला, कबाड़, जुआ -सट्टा, और नशे के अवैध कारोबार में जुड़े लेागों को संरक्षण
अपराध की श्रेणी में शामिल तमाम असामाजिक गतिविधियों में शामिल अवांछनीय तत्वों, और माफिया कहे जाने वाले लोगों के लिये यदि समूचे शहडोल जिले व संभाग में कोई सबसे सुरक्षित क्षेत्र है तो वह सोहागपुर थाना क्षेत्र है। थाना प्रभारी भले ही बदल गए हों लेकिन थाने की व्यवस्था नहीं बदली है। रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के साथ ही, कोयले का अवैध कारोबार भी क्षेत्र के विशेष हिस्सों में बदस्तूर जारी है। गांजा, नशीली दवाओं के इंजेक्शन, टैबलेट और कबाड़ के अवैध ठीहों की मौजूदगी सोहागपुर थाने के सेटिंगबाजों की मेहनत और उसकी सफलता की कहानी स्वत: ही बयां करती है।
शहडोल। राजनीतिक, अर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में भले ही शहडोल जिले के दामन में पिछड़ेपन का बदनुमा दाग लगा हो, अवैध एवं आपराधिक गतिविधियों के मामले में इसने विकास के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर डाले हैं। कोयले के अवैध उत्खनन के साथ ही रेत खनन, परिवहन, नशा कारोबार, पशुतस्करी, जुआ-सट्टा, कबाड़ और शराब की नदियां बहाने वालों को पूरे जिले में यदि कहीं सर्वाधिक संरक्षण मिला तो वह है सोहागपुर थाना। जब से सोहागपुर थाना गठित हुआ है उसके बाद से अवैध कारोबारियों की तो जैसे चांदी ही हो गई है। सोहागपुर थाने के जितने प्रभारी हुए सभी ने कमोबेश अपराधियों एवं माफियाओं को खुलकर संरक्षण दिया और छक कर लाभ भी कमाया है। नए थाना प्रभारी अरुण पांडेय ने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है जिनसे व्यवस्था में सुधार की उ मीद की जा रही थी लेकिन मौजूदा हालातों को देखकर ऐसा लगता नहीं है कि लोगों की उ मीदें पूरी भी हो पाएंगी।
खेत उगल रहे रेत
जिला एवं पुलिस प्रशासन सहित आम जन को ाी इस बात की पु ता जानकारी है कि शहडोल जिले की रेत खदानों का ठेका इस साल नहीं हो सका यानी जिले की सभी रेत खदानें ऑन दि रिकॉर्ड बंद हैं और उनसे रेत की निकासी नहीं हो रही है। रेत की खदानें बंद होने के बावजूद संभाग मु यालय सहित पूरे जिले में चल रहे सैकड़ों हजारों निर्माण कार्यों के लिये रेत कहां से आ रही है यह शायद किसी को मालूम नहीं है, या मालूम है तो जानबूझकर अनजान बनने का उपक्रम किया जा रहा है। जिले के विभिन्न थानों में स्थिति जो भी हो सोहागपुर थाना क्षेत्र में तो डंके की चोट पर रातों-दिन डग्गियों, टालियों से रेत की आपूर्ति बदस्तूर जारी है। सवाल यह उठता है कि जब सारी खदानें बंद हैं तो क्या सुनहरी रेत ग्रामीण किसानों के खेतों में पैदा होने लगी है जिसकी निर्बाध आपूर्ति सोहागपुर थाने की खाकी के संरक्षण में जारी है?
कोयले की अवैध खदानें
सोहागपुर थाना क्षेत्र में कोयले का अकूत भंडार है। हालांकि यह भंडार भूमि की सतह से काफी नीचे है लेकिन फिर भी कहीं-कहीं जमीन की सतह पर भी है जैसे पटासी और बडख़ेरा गांव। एसईसीएल के सर्वे के मुताबिक पटासी बडख़ेरा क्षेत्र में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है जिसे देखते हुए नई कोयला खदान की स्वीकृति भी मिल चुकी है। प्रक्रिया जारी है और शीघ्र ही उत्पादन शुरू होने की संभावनाएं जताई जा रहीं हैं। क्षेत्र में कोयला होने की जानकारी लोगों और शासन-प्रशासन को काफी पहले से है यह बात दीगर है कि सर्वे होने में देरी हो गई और इसका फायदा लोकल कोल माफियाओं ने जमकर उठाया। सूत्रों की मानें तो अभी भी दिन-रात कोयले का अवैध उत्खनन और परिवहन जोर-शोर से जारी है और थाने के सेटिंगबाज कर्मचारियों के मार्फत प्रभारी का वरदहस्त माफियाओं को प्राप्त है। इस गोरखधंधे की जानकारी वर्दी धारियों को भली भांति है लेकिन मोह है कि छूटता नहीं है। इसी मोह-माया के चक्कर में वर्दी के खिलाफ वर्दी का नजारा भी सामने आ चुका है लेकिन कुत्ते की पूंछ टेढी की टेढ़ी ही है।
नशे का कारोबार
थाना मु यालय सोहागपुर सहित पूरे क्षेत्र में नशा सिर चढ़कर बोल रहा है। गांजा, सिरप, इंजेक्शन तो गली-गली बिक ही रहे हैं, रही-सही कसर अवैध पैकारियों ने भी पूरी कर दी है। पूरे थाना क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में अवैध शराब उपलब्ध है, जो मदिरा ठेकेदार के करिदों द्वारा गांव-गंाव पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा सोहागपुर गढ़ी बाजार से लगी कुलिया में वर्षों से गांजे की पुडिय़ा बिकती रही है और बीट संभालने वाले इन कारोबारियों से उपकृत होते रहे हैं। सोहागपुर गढ़ी बाजार के साथ ही कोटमा तिराहा, बाणगंगा बाईपास तिराहा, सहित कई स्थानों पर नशे का कारोबार बेखौफ जारी होना इस बात का प्रमाण है कि सोहागपुर थाना पुलिस के सेटिंगबाज कर्मियों ने जो बिसात बिछाई है उसमें प्रभारी और कारोबारी सभी समाए हुए हैँ और खमियाजा आम जन विशेषकर युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
कबाड़ से जुगाड़
सोहागपुर थाना से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर ही कबाड़ का ठीहा संचालित है। देखने में तो यह ठीहा बहुत छोटा है लेकिन सूत्रों की मानें तो जिले के जितने कबाड़ी या कबाड़ माफिया हैं उन सबमें यह ठीहा बड़ा खास है और सभी कबाडिय़ों का सरगना बन चुका है। सूत्रों का मानना है कि सोहागपुर थाने के पास कबाड़ का ठीहा चलाने वाले इस कबाड़ी को खादी और खाकी का भरपूर संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर कबाड़ के नाम पर बेशकीमती धातुओं विशेषकर चोरी के माल को खपाने और जिले से बाहर भेजने का कार्य अवैध तरीके से किया जा रहा है।
सोहागपुर थाने में जारी कथित गतिविधियों और अपराधियों को संरक्षण दिये जाने संबंधी जनचर्चाओं के मद्दे नजर जिले के लोगों ने लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले तथाकथित सेटिंग बाजों पर अंकुश के साथ ही अपराध पर नियंत्रण स्थापित किये जाने की मांग की है।

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