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आरकेटीसी : मजदूर रखा जैसे मवेशी

 ठेका कंपनी के कैंप में श्रमिकों के ठहरने की नहीं समुचित व्यवस्था

श्रम कानूनों खुला उल्लंघन 

प्रबंधन और जीएम के गुंडों की मनमानी जारी 

रोजगार देने के नाम पर उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित तमाम राज्यों से मजदूर तो ले आए, उनसे काम भी ले रहे हैं लेकिन उन्हें दे क्या रहे हैं इस सवाल के जवाब पर गौर किया जाए तो आरकेटीसी इन्फोटेक कंपनी के स्थानीय करिंदों की करतूतों का पिटारा खुल जाएगा। तमाम कानूनी प्रावधानों को रौंदकर जिस तरह से ठेक ा कंपनी के जीएम और उनके चहेतों की फौज मनमानी पर उतारू है उसे देखते हुए यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि एसईसीएल एवं एरिया मैनेजमेंट के कतिपय धनलोलुप टाइप के  अधिकारियों का वरदहस्त बरकरार है।


शहडोल। सोहागपुर कोयलांचल के अमलाई ओसीएम में ओबी हटाने का ठेका प्राप्त कंपनी आरकेटीसी के अधिकारियों एवं उनके पाले हुए तथाकथित पर्सनल सुरक्षा अधिकारियों और मजदूरों के तथाकथित ठेकेदारों की मिली भगत, कंपनी के अधीनस्थ  कार्य करने वाले सैकड़ों मजदूरों कर्मचारियों के लिये अत्यंत घातक और जानलेवा साबित हो सकती है। आवासीय सुविधा के नाम पर एक डिब्बे में दर्जनों कर्मियों को भेड-बकरी से भी बदतर हालत में रहने को मजबूर कर तमाम श्रम एवं औद्योगिक कानूनों को पैरों तले रौंदने का किया जा रहा है।
कठपुतली प्रबंधन
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरकेटीसी इन्फोटेक नामक ठेका कंपनी ने अमलाई ओसीएम के ओबी हटाने के ठेका स्थल पर काम को अंजाम देने के लिये विधिवत टीम गठित कर सोहागपुर एरिया भेजा और पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मदारी महाप्रबंधक को सौंप दी गई। कंपनी के डायरेक्टरों ने तो जीएम नियुक्त कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी लेकिन कंपनी द्वारा बनाए गए जीएम ने कंपनी हित को सर्वोपरि मानने के बजाय स्वहित को प्राथकिता देनी शुरू कर दी और कंपनी प्रबंधन को ऐसे लोगों के हाथ की कठपुतली बना दिया जिनको सिर्फ पैसों से मतलब है।
डिब्बे में श्रमिक आवास
आरकेटीसी कंपनी द्वारा उड़ीसा, झारखंड आदि राज्यों से मजदूरों को रोजगार देने के नाम पर लाया गया है। इन मजदूरों में अधिकांश भारी वाहन चालक हैं। दिन भर भारी वाहन चालकों को कई-कई घंटे वाहन चलाने के बाद यदि कुछ झांटों की नींद भी न मिल पाए तो वह कितने किद कुशलता पूर्व काम कर पाएंगे  और या कितने दिन जीवित रह पाएंगे इन सवालों का जवाब शायद किसी के पास नहीं है। कंपनी के जीएम कहे जाने वाले वेंकटेश्वरा रेड्डी नामक व्यक्ति ने बाहर से लाए गए मजदूरों के रहने के लिये जो व्यवस्था की गई है वह न सिर्फ हास्यास्पद बल्कि शर्मनाक भी  मानी जा रही है। पफ पैनल से बनाए गए ट्रेन के डिब्बे जैसे करीब 30 वर्ग मीटर के आवास में मवेशियों की भांति रखा गया है। इस डिब्बे में 40 के लगभग श्रमिकों को रखा गया है, जिससे उन्हें घुट-घुटकर जीना पड़ रहा है।


आवारा कुत्ते अच्छे
ठेका कंपनी के कैंप अमलाई ओसीएम में श्रमिकों के शोषण और कंपनी तथाकथित अधिकारियों की मनमानी के संबंध में लगातार मिलने वाली खबरों की पुष्टि के उद्देश्य से जब कैँप की स्थिति का जायजा लिया गया तो हालात अच्छे नहीं दिखे। कंटेनर कहेजाने वाले डिब्बों में रहने वाले कुछ श्रमिक, चालकों ने चर्चा के दौरान बताया कि मजबूरी में काम के नाम पर आ तो गए हैं लेकिन यहां के हालात ऐसे हैं कि यह लगता ही नहीं कि ज्यादा दिन चल पाएंगे। कुछ कर्मचारियों ने तो अपनी बेबसी का इजहार कंटेनर की छांव में आराम  से लेटे आवारा कुत्तों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यहा के मजदूरों से अच्छे तो ये आवारा कुत्ते हैं जो कम से कम खुली हवा मे सांस तो ले पा रहे हैं।
मुंबईया जीवन
बताया जाता है कि आरकेटीसी कंपनी के कर्ता-धर्ताओं ने पफ पैनल से बनाए गए संकरे डिब्बे में करीब 40 बेड लगे हुए है जो आपस में बिल्कुल सटे हुए है और बेड के ऊपर बेड लगवा कर उन्हें इस लायक भी नहीं छोड़ा कि वह बेड पर या उसके अगल-बगल कहीं बैइ या खड़े हो सकें। अभी ठंड का मौसम था तो किसी तरह मजदूरों ने दम साधकर मुंबईया जीवन शैली में गुजारा कर लिया लेकिन अब तो गर्मी भी अपना रौद्र रूप दिखाने को आतुर है। ऐसे हालात में  मजदूर कैसे रह पाएंगे और या काम कर पाएंगे इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। सवाल यभी उठता है कि ऐसी व्यवस्था मुहैया कराने वाले आरकेटीसी जीएम और उनके चापलूस बन चुके कथित नेतागण एक दिन भी गुजार सकते हैं ?
कानूनों का उल्लंघन
देश व प्रदेश का कोई भी कानून किसी श्रमिक या कर्मचारी को बदतर जीवन जीने के लिये विवश करने की इजाजत नहीं देता है। यहां तक कि औद्योगिक और श्रम से जुड़े कानूनों में काम के घंटों, पारिश्रमिक, बुनियादी सविधाओं, सुरक्षा, एवं स्वास्थ्य के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किये गए हैं जिनका पालन आरकेटीसी कंपनी के जीएम रेड्डी और उनके मातहतों द्वारा नहीं किया जा रहा है। यदि एक बार श्रम विभाग की टीम आरकेटीसी कंपनी के मजदूरों और उनके हालात का निरीक्षण कर ले तो कानून की धज्जियां किस तरह उड़ाई जाती है इसका पुख्ता प्रमाण मिल जाएगा।
बच्चों से भी कम जगह
शासन द्वारा स्कूलों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और शैक्षणिक माहौल बनाने के लिये कई नियम लागू किये हैं जिनमें से एक प्रति बच्चे के लिये न्यूनतम स्थान का भी निर्धारण किया गया है। बच्चों को बैठकर पढ़ाई करने के लिये न्यूनतम स्थान 1 वर्गमीटर होना अनिवार्य है यानी छोटे बच्चे भी एक वर्ग मीटर से कम स्थान पर बैठकर नहीं पढ़ सकते हैं। यदि यह सच्चाई है तो एक मीटर से भी कम स्थान में एक स्वस्थ कामकाजी व्यक्ति पूरी रात कैसे सो सकता है या रात गुजार सकता है। मौजूदा हालातों के मद्देनजर यदि एरिया प्रबंधन और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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