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जिला पंचायत : यहां के हम हैं राजकुमार...

 नियम हुए तार-तार तब मिला महत्वपूर्ण प्रभार

भर्ती नियमों की देकर कुर्बानी, लिख रहे भ्रष्टाचार की नित नई कहानी

विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा वर्ग के लिए आरक्षित और बैगा अभ्यर्थी द्वारा त्यागपत्र दिए जाने पर रिक्त हुए डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर शासकीय नियम निर्देशों की बलि देकर अधिकारियो की विशेष कृपा से नियुक्ति प्राप्त करने वाला राजकुमार नामक कर्मचारी अब वास्तव में जिला पंचायत का राजकुमार बन चुका है। जिस प्रकार महाभारत काल में धृतराष्ट्र के राजा होने के बावजूद राजकुमार दुर्योधन के हाथ में सत्ता की चाबी थी वही राजा के रूप में निर्णय लेता था, ठीक उसी प्रकार इस राजकुमार के पास भी अघोषित सत्ता और खजाने की चाभी पहुंच गई है। न सिर्फ सीईओ जिला पंचायत के स्टेनो का दायित्व बल्कि मन चाहे शाखाओं का प्रभार भी हासिल करने में सफल ऑपरेटर ने चंद सालों में वह मुकाम हासिल कर लिया कि जिले की ग्रामीण सत्ता यानी जिला पंचायत के युवराज न सही राजकुमार का रुतबा तो बरकरार है।


शहडोल। जिले की सर्वोच्च निर्वाचित संस्था जिला पंचायत के गलियारों में इस समय कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का मामला काफी गरमाया हुआ है। हालांकि इस प्रकार के मामले पहले भी कई बार उठते रहे हैं, जिन्हें कभी अधिकारियों तो कभी नेताओं की दखल अंदाजी के बाद दफन कर दिया गया लेकिन ताजा मामला ऐसा है जिसने न सिर्फ संबंधित कर्मचारी बल्कि उनके तथा कथित आकाओं की भी नींद उड़ाकर रख दी है। मामला है मध्यान्ह भोजन योजना के डाटा इंट्री ऑपरेटर पद पर की गई भर्ती का जिसके तहत नियुक्ति प्राप्त करने वाला ऑपरेटर आज जिले के पूरे ग्रामीण विकास विभाग की चाभी हाथ में थाम कर बैठा है।

 सूत्रों की माने तो राजकुमार गौतम नामक डाटा इंट्री ऑपरेटर की भर्ती बीआरजीएफ स्कीम में वर्ष 2011 में हुई और 2015 में सेवा समाप्त भी कर दी गई। क्योंकि बीआरजीएफ नामक योजना ही बंद हो चुकी थी। उधर बिल्ली के भाग्य से सींका टूटा वाली कहावत चरितार्थ हुई और मध्यान्ह भोजन योजना में पूर्व से नियुक्त डाटा इंट्री ऑपरेटर शिवकुमार बैगा जिसे विशेष भर्ती अभियान के तहत नियुक्त किया गया था का चयन अन्य किसी विभाग में हो जाने के कारण उसने त्याग पत्र दे दिया। शिवकुमार के त्यागपत्र देने के बाद डॉटा इंट्री ऑपरेटर के अभाव की समस्या उत्पन्न हुई और नई भर्ती पर विचार किया जाने लगा चूंकि राजकुमार गौतम बीआरजीएफ में डॉटा इंट्री ऑपरेटर के रूप में काम कर चुके थे, अधिकारी कर्मचारियों से अच्छी खासी पहचान थी। इसलिये अधिकारियों ने जान-पहचान का लाभ प्रदान करते हुये राजकुमार को मध्यान्ह भोजन योजना में डॉटा इंट्री ऑपरेटर के रूप में भर्ती करने के संबंध में राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा। जिसके जबाब में राज्य शासन के ज्ञाप. क्रं. 209/22 वी १/एमडीएम/ स्था./2016 द्वारा मार्गदर्शन दिया गया कि शासन के ज्ञाप.क्रं. 11680 दिनांक 24 जुलाई 2007 के बिंदु क्रमांक 1.4 के पालन में जिला स्तर से कार्यवाही की जा सकती है।

बिंदु क्रं.1.4 में यह उल्लिखित है कि विशेष वर्ग की भर्ती अभियान के तहत स्वीकृत पद पर विशेष वर्ग की ही भर्ती की जा सकती है। बावजूद इसके राजकुमार गौतम को डाटा इंट्री ऑपरेटर के रूप में भर्ती कर विशेष भर्ती अभियान की सारी शर्तों और नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा दी गई। मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभारी द्वारा न तो भर्ती के लिये कोई विज्ञापन निकाला गया, न आवेदन मंगाये गये और ना ही किसी प्रक्रिया का पालन किया गया। यह उल्लेख करते हुये कि मेरे मतानुसार राजकुमार गौतम की नियुक्ति उचित है। यह भर्ती फर्जी तरीके से अंजाम दे दी गई जिसकी निष्पक्ष जाँच और सख्त कार्यवाही निंतात आवश्यक है।


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