लोकल चौकड़ी के हाथों की कठपुतली बने कंपनी जीएम रेड्डी
एसईसीएल सोहागपुर कोयलांचल अंतर्गत अमलाई ओसीएम में ओबी हटाने का ठेका प्राप्त कंपनी आरकेटीसी शासन या एसईसीएल के दिशा निर्देशों और कंपनी के डायरेक्टर्स-मैनेजमेंट के गाइडलाइन पर अमल के बजाय छकड़ी के इशारों पर नाचती नजर आ रही है। इस छकड़ी में कंपनी के जीएम वीवी रेड्डी और अमलाई ओसीएम के अधिकारी रमन्ना के अलावा लोकल नेता बनाम मजदूर सप्लायर्स बनाम कथित बाहुबलियों की चौकड़ी शामिल है जिनके इशारे और रहमो करम पर आरकेटीसी कंपनी की लुटिया डुबोने का कथित अभियान चलाया जा रहा है। शायद यही वजह है कि कायदा, कानून, नियम, निर्देश, प्रतिबंध ही नहीं कंपनी के रूल-रेगुलेशन की हर कड़ी तेजी के साथ दरकती ही जा रही है।
शहडोल। एसईसीएल के सोहागपुर कोयलांचल अंतर्गत अमलाई ओसीएम इन दिनों न सिर्फ सोहागपुर कोयलांचल बल्कि समूचे जिले व संभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी कोयले के प्रचुर भंडार तो कभी बेहतर उत्पादन के लिये एसईसीएल, कोल इंडिया ही नहीं, देश प्रदेश में भी याति अर्जित करने वाली इस खुली खदान की बेहतर छवि पर कीचड़ मलने का कार्य ओसीएम के प्रबंधक श्री रमन्ना के संरक्षण में ठेका कंपनी आरकेटीसी के जीएम वीवी रेड्डी और कथित गुर्गों द्वारा किया जा रहा है। मजदूरों के शोषण और नियम निर्देशों की धज्जियां उड़ाने वाली छकड़ी के कारनामों पर यदि समय रहते कारगर अंकुश न लगा तो जाहिर है कि बदइंतजामी और बदनामी के छींटों से एरिया महाप्रबंधक श्री जेना भी स्वयं को शायद ही बचा पाएंगे।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी पर यदि यकीन किया जाए तो आरकेटीसी कंपनी के जीएम रेड्डी ने अपनी एक अलग ही सल्तनत कायम कर रखी है जहां वह किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ भी कर सकते हैं। चाहे जिसे मिनटों में नौकरी देकर लाईजनिंग ऑफीसर या मैनेजर बना दें या फिर किसी भी कार्यरत मजदूर, कर्मचारी चाहे वह कितना ही जि मेदार या ईमानदार क्यों न हो पल भर में सड़क का भिखारी बना सकते हैं और यही कर भी रहे हैं। अमलाई ओसीएम में सारा विवाद भी इन्हीं गतिविधियों के चलते उत्पन्न हुआ जो लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि ठेका कंपनी का यह जीएम शायद स्वयं को सोहागपुर कोयलांचल का भाग्य विधाता ही मान मान बैठा है, यह बात दीगर है कि उन्हें खुद के भाग्य और भविष्य का पता नहीं है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक राजा और राकेश तिवारी भी उक्त छकड़ी का हिस्सा हैं। वह पहले मामूली मजदूर सप्लायर थे फिर बाहुबली बनकर रेडड़ी के अंगरक्षक की भूमिका में नजर आए और काम से निकाले गए मजदूरों को निकाले जाने पर समझौता वार्ता में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप करते नजर आए थे। मजदूरों और उनके अधिकारों की लड़ाई में साथ देने सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति व्यक्त कर उन्हें मीटिंग से बाहर किये जाने एवं विरोध मुखर होन पर श्री रेड्डी ने आनन-फानन में उन्हें लाईजनिंग ऑफीसर के रूप में बैक डेट से नियुक्ति देकर प्रस्तुत कर दिया गया लेकिन इस सवाल का जवाब उनके पास भी नहीं हैं कि पूर्व के उनके कारनामों और मजदूरों की आपूर्ति या कथित तस्करी के रिकॉर्ड को वह कैसे छिपा पाएंगे।
हालांकि मूक मवेशियों यानी गौवंश की सामूहिक लापरवाही जन्य मौत का मामला उठने के बाद आरकेटीसी कंपनी और अमलाई ओसीएम के उन अधिकारी-कर्मचारियों में दहशत की चर्चा आम है जो आरकेटीसी कंपनी और अमलाई ओसीएम में कार्यरत रहते हुए इस गोरखधंधे में शामिल रहे हैं। लोगों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन के सक्रिय हो उठने की आशंका के मद्देनजर अब वही कर्मचारी- अधिकारी एरिया व प्रदेश छोड़कर भागने की फिराक में हैं ताकि किसी प्रकार उनकी जान बचे और कोई आपराधिक प्रकरण उनके सिर पर ज्ञी न आ जाए।
अमलाई ओसीएम में जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर सोहागपुर एरिया मैनेजमेंट विशेषकर मु य महाप्रबंधक श्री जेना की चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का केन्द्र बनी हुई है। यदि एरिया महा प्रबंधक ने समय रहते चर्चित गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया तो वह दिन दूर नहीं जब वह भी छकड़ी के कारण दरकती हर कड़ी को देखते हुए आरोपों की झड़ी की जद में आ जाएं।

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