आरकेटीसी और कॉलरी प्रबंधन के खिलाफ क्या दर्ज होगा हत्या का मामला
एक इंसान और 13 गौवंश की मौत का जिम्मेदार कौन ?
रेड्डी के समर्थन में रमन्ना, पूरी हो रही हर अधूरी तमन्ना
" सोहागपुर कोयलांचल के अमलाई ओसीएम में लापरवाही जन्य हादसों का दौर-दौरा जारी है। कार्य के अनुकूल परिस्थितियां न होने के बावजूद आरकेटीसी कंपनी द्वारा ऑपरेटर से मशीन संचालन कराए जाने से एक ऑपरेटर की जल समाधि हो गई तो दूसरी ओर बारूदी पानी खुले में छोड़ दिये जाने की कथित लापरवाही ने 13 गौवंश को असमय मौत की नींद सुला दिया। इन दोनों हादसा रूपी वारदातों के लिये जितना जिम्मेदार आरकेटीसी प्रबंधन है उतना ही अमलाई ओसीएम और सोहागपुर कोयलांचल प्रबंधन भी जिम्मेदार है। यह सच सभी के सामने होते हुए भी पीसीबी, पुलिस और श्रम विभाग के साथ ही एसईसीएल प्रबंधन की चुप्पी के लिये आरकेटीसी की रेवड़ी जिम्मेदार मानी जा रही है। फिर भी यह सवाल आम जन के कौतूहल को को बढ़ा रहा है कि क्या इन दोनों दर्दनाक घटनाओं के लिये प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से जिम्मेदार आरकेटीसी प्रबंधन, एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा और यह कि कब तक कंपनी की लापरवाही और कितनी जानें लेगी। "
अमलाई ओसीएम में विगत माह 13 गौवंश की मत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में हो गई। पूरे कोयलांचल में चर्चा है कि ओबी हटाने का कार्य प्राप्त करने वाली ठेका कंपनी आरकेटीसी और अमलाई ओसीएम मैनेजमेंट की गलती के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ है। सूत्रों का मानना है कि कंपनी ने एसईएमई यानीे कैमिकल युक्त बारुद को खदान के अंदर मंगवाया गया थाउसके पानी में मिल जाने और उसी पानी को पी लेने से गायों की मौत हुई है। गौवंश की मौत या कथित हत्या की जिम्मेदारी से आरकेटीसी कंपनी,बारुद सप्लाई करने वाली कंपनी,बारुद वाहन और अमलाई ओसीएम मैनेजमेंट स्वयं को अलग नहीं कर सकते है । सवाल यह उठता है किआरकेटीसी कंपनी, बारुद सप्लाई करने वाली कंपनी,बारुद वाहन और अमलाई ओसीएमप्रबंधन क्या कर रहा था जब खदान के अंदर जहरीला बारूद पानी को गिराया जा रहा था।
सुरक्षाकी अनदेखी
अमलाई ओसीएम प्रबंधन ने पर आरोप है किे खदान यानी कोयला उत्पादन क्षेत्र में आमजन या मूक मवेशियों की सुरक्षा ही नहीं अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिये भी कोई ठोस प्रबंध नहीं किये गए हैं। सवाल यह उठता है किखदान के चारो ओर बड़ी और गहरी नाली क्यों नहीं बनवाया गया, कार्य क्षेत्र को तार फेंसिंग के द्वारा बंद क्यों नहीं कराया गया। सुरक्षा प्रबंध न होने से सैकड़ो गाय खदानों में घुस गई और इन सब जिम्मेदारो की लापरवाही से पहले 8 गायों और दूसरी बार 13 गायों की दर्दनाक मौत हुई। वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वह वाहन जिससे खदान के अंदर बारुद का पानी गिराया जा रहा है वह भी स्पष्ट दिखाया गया है।
कहां थे जिम्मेदार
जानकार सूत्रों की मानें तो कॉलरी प्रबन्धन,आरकेटीसी कंपनी को किसी भी तरह से सिर्फ उत्पादन से मतलब है सुरक्षा मानको की कोई चिंता किसी को भी नहीं है। चाहे मूक जानवर मरे या आरकेटीसी कंपनी का वाहन चालक अनिल कुशवाहा हो। आरकेटीसी कंपनी सिर्फ येन केन प्रकारेण अपना उल्लू सीधा करना चाहती है और कालरी के अधिकारीयो को अपनी ऊपरी कमाई से मतलब है,वह चाहे रोड़ सेल के माध्यम से हो, या कर्मचारियों के शोषण से या प्राइवेट कंपनी द्वारा सुरक्षा मानको की कमीयों को अनदेखा करने से हो या फिर गौवंश की कथित हत्या के मामले को दबाने से हो, यही वजह है कि इतने बड़े कांड के बाद भी मैनेजमेंट के कानों में जूं नहीं रेंगा।
सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का
अमलाई ओसीएम और सोहागपुर कोयलांचल मैनेजमेंट द्वारा सुरक्षा मानको की कमियों पर ध्यान न देने से प्राइवेट कंपनी बेलगाम होकर कार्य कर रही है इसी वजह से वाहन चालक अनिल कुशवाहा की मृत्यु हो गई,आरके टीसी कंपनी और अमलाई ओसीएम मैनेजमैंट ने वर्क आर्डर की शर्तों और नियमों के अनुसार कंपनी से काम करवाया होता,और कंपनी नियमानुसार काम करती, तो आज अनिल कुशवाहा जीवित होता। ये सब अपने दायित्वों से बच नहीं सकते हैं। कंपनी आरकेटीसी कुल मिलाकर इस तर्ज पर कार्य कर हरही है कि सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का...यानी रमन्ना के होते हुए रेड्डी को चिंता करने की क्या जरूरत है? हालांकि आमजन का यही मानना है कि आज नहीं तो कल जांचोपरांत इन सभी पर कार्यवाही होगी, अनिल कुशवाहा के परिवार जनों ने हाईकोर्ट में केस लगाया है। आम लोगों के बीच यह सवाल सरगर्म है कि क्या आरकेटीसी, अमलाई ओसीएम, और सोहागपुर कोयलांचल के लापर वाह अधिकारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज होगा और असमय काल का ग्राय बनी जीवात्माओं को कभी न्याय मिल पाएगा।

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