आरकेटीसी: सुनने के बजाय मरने की सलाह
एसईसीएल में आरटीआई यानी नक्कारखानें में तूती की आवाज
अवैध कमाई के मद में चूर कंपनी के करिंदों की शर्मनाक करतूत
" मक्खी गुड़ में चिपकती तो जरूर है लेकिन मिठास के चक्कर में उसे अपनी जान भी गंवानी पड़ जाती है, बच्चों तक को मालूम इस कटु सत्य को जानने समझने के बावजूद एसईसीएल के सोहागपुर कोयलांचल के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा ठेका कंपनी आरकेटीसी की अवैध गतिविधियों, मजदूरों के शोषण और उनके जायज अधिकारों के हनन जैसे मुद़दों पर न सिर्फ चुप्पी साध रखी गई है बल्कि जागरुक लोगों द्वारा लगाए गए सूचना के अधिकार आवेदनों को भी रद़दी की टोकरी में फेंककर यह साबित करने का प्रयास किया है कि चांदी चाहे जूते की शक्ल में भी हो पर कीमती तो होती है। एहसानमंद कालरी प्रबंधन की कृपा का ही परिणाम है कि आरकेटीसी के स्थानीय करिंदों द्वारा अपनी समस्या बताने पर मजदूरों को मदद के बजाय मौत को गले लगा लेने की सलाह भी कथित तौर पर दे दी जाती है।"
शहडोल। आरकेटीसी कंपनी की विधि विरुद्ध कारगुजारियों, अनियमितता,सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद ठेका कंपनी के स्थानीय करिंदों को कथित अर्थिक समीकरणों के प्रभाववश बचाने में लगे एसईसीएल सोहागपुर एरिया प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आरटीआई (सचना का अधिकार ) तहत मांगी गई जानकारी समय से नहीं दी जा रही है । यही वजह है कि दिनांक 31 दिसंबर 2025 और 04 नवंबर 2025 के आवेदन पत्र और उन पर की गई प्रथम अपील की आज दिनांक तक सुनवाई तक नहीं की गई। सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के कानूनों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
आरोपित किया गया है कि सरकार और उसके अनुषांगिक संगठनों के कार्यों में पारदर्शिता होने की मंशा का माखौल उड़ाया जा रहा है ताकि आरकेटीसी कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय, स्थानीय दलालों, एजेन्टों के माध्यम से आर्थिक शोषण, सुरक्षा में अनदेखी, कर्मचारियों के जान के साथ खिलवाड़, कार्य के घंटे,समय पर वेतन न देना, सीएमपीएफ फन्ड की जानकारी न देना, खदान के अंदरं ं कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों का एसईसीएल के टाइम आफिस में हाजरी न भेजना , कर्मचारियों को सीआईंएल के नियमानुसार सुविधा न देना, स्वास्थ्य,बीमा आदि का खुलासा न हो जाए।
गौर तलब है कि अमलाई ओसीएम में ओबी हटाने का ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी आरकेटीसी द्वारा जिले के बाहर से तथा स्थानीय मजदूर तस्करों की थैली से मजदूरी चोरी के अभिशाप से ग्रस्त मजदूरों के साथ चल रहे शोषण, अन्याय और जायज हकों से वंचित रखे जाने का गोरख धंधा जोर-शोर से जारी है। कंपनी के दलालनुमा स्थानीय कर्ताधर्ताओं की कहीं पोल न खुल जाए इस डर से एसईसीएल और आरकेटीसी कंपनी दोनों सांठ गांठ कर जानकारी देने से बच रहे हैं, और सूचना अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।
मरता है तो मर जा....हम देख लेंगे
आरकेटीसी कंपनी की साख को बट्टा लगाने के साथ ही जिस पत्तल में खाते हैं उसी में छेद करने की प्रवृत्ति वाले टेका कंपनी के स्थानीय करिंदों की कथित ज्यादती के शिकार, अमलाई ओसीएम प्रबंधन और आरकेटीसी जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने वाले एक श्रमिक को न केवल काम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, बल्कि जब उसने अपनी व्यथा सुनाई, तो प्रबंधन ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए उसे ‘मर जाने’ तक सलाह दे डाली। शिकायत कर्ता कैलाश यादव (निवासी- खमरिया, अनूपपुर) ने धनपुरी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है। कैलाश के अनुसार, वह पिछले 3 महीनों से काम की तलाश में भटक रहा था। आज जब वह अपने काम के सिलसिले में कंपनी परिसर पहुँचा, तो वहाँ मौजूद राज तिवारी और श्रीकांत दाहिया ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पीडि़त का आरोप है कि जब उसने अपनी आर्थिक स्थिति और मजबूरी का हवाला देते हुए यहाँ तक कह दिया कि काम नहीं मिला तो मैं आत्महत्या कर लूँगा, तो प्रबंधन के नुमाइंदों का दिल पसीजने के बजाय और कठोर हो गया। राज तिवारी और श्रीकांत दाहिया नामक तथाकथित कर्ताधर्ताओं ने अहंकार में चूर होकर कह दिया कि तू कुछ भी कर ले, हम देख लेंगे, इतना ही नहीं पीडि़त के साथ अभद्रता करते हुए उसे दोबारा कंपनी परिसर में न दिखने की धमकी देकर भगा दिया गया।
एक तरफ शासन-प्रशासन, एसईसीएल और विभिन्न कंपनियों द्वारा श्रमिकों के हितों की रक्षा के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, वहीं दूसरी ओर सरेआम एक गरीब को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि हालातों से मजबूर श्रमिक हीन भावना का शिकार होकर यदि कोई अप्रिय कदम उठा लेता या अपनी जीवन लीला ही समाप्त करने का प्रयास कर बैठता तो इसके लिये कौन जिम्मेदार होता। सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी श्रमिक को डराना-धमकाना और उसे मौत के मुंह में ढकेलना अब आम बात नहीं हो गई है?
आरकेटीसी और अमलाई ओसीएम प्रबंधन के बीच कथित आर्थिक समीकरणों की जो खिचड़ी पक रही है उस पर एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही जिला प्रशासन की नजर पडऩा और सख्त कार्यवाही होना नितांत आवश्यक है, अन्यथा कभी भी किसी बड़ी गंभीर वारदात की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है।

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