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सड़कों पर नहीं दिखते ओव्हरलोड वाहन

 महाकाल के दिव्य प्रकाश में चौंधियाईं जिम्मेदारों की आंखें

न नदी की दुर्दशा दिखती, न ही ओव्हरलोड हाईवा

" जितना गुड़ डालोगे उतना ही मीठा होगा" वाली कहावत को फार्मूले की भांति लागू करते हुये उमरिया के रेत ठेकेदार ने रेत खदानों में अपनी मनमानी का सिक्का दौड़ा रखा है, यहां तो महाकाल के गुड़ की मिठास में डूबे प्रशासन ने भी आँख मूंद ली है। चूंकि यह ठेका एक ऐसे विधायक का है जो इन दिनों सुर्खियों में भी है। आखिरकार ठेकेदार ही माफिया क्यों बन बैठा यह बात समझ तो से परे है बहरहाल खुले तौर पर वसुंधरा का तो चीरहरण हो ही रहा है, नदियों के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा हो गया है। महाकाल के दिव्य प्रकाश की चकाचौंध में उमरिया और शहडोल जिले के हुक्मरानों की आंखे ऐसी चुंधियाई हैं कि सड़कों पर दौड़ते ओव्हरलोड भारी भरकम वाहन तक नजर नहीं आते हैं।


शहडोल। उमरिया जिले में रेत का ठेका महाकाल कंपनी को दिया गया है, महाकाल का अर्थ है काल बनकर उन पर टूटना जो अन्याय कर रहे हों। लेकिन ये महाकाल नदियों पर काल बनकर टूटा है-और चाहे वो पुलिस  प्रशासन हो या फिर जिला प्रशासन। दोनो हो ही चांदी के चंद सिक्कों के आगे न देखने की कसम खिला रखी है। यही कारण है कि खनिज अमला भी मौन है और खाकी भी मौन है। खादी तो इसलिये मौन है कि विधायक के इसारे पर ही सब कुछ हो रहा है। मैनेंजमेंट के फण्डे में दिव्य तरीके से जो प्रकाश फैला है उसकी खनक के आगे सारे नियम-कानून-कायदे ताक पर चले गये हैं। 

ओव्हर लोड का खेल

यूं तो उमरिया जिले में पुलिस कप्तान की नजर हर थाने पर है, हर सिपाही है और उनका यह अमला हर उस वाहन के लिये तैनात रहता है जिसमें उन्हें थोड़ा भी ओव्हर लोड होने की गुंजाईस रहती है। लेकिन रेत के ओव्हर लोड को लेकर कप्तान का मौन भी सवालों के घेरे में है। ऐसा माना जाता है कि कप्तान के पास भी दिव्य का प्रकाश फैला हुआ है।

26 में 52 तरीके 

उमरिया जिले में महाकाल के पास 26 रेत खदाने हैं और ऐसी कोई रेत की खदान नहीं है जिसमें पूरी तरह से नियम का पालन हुआ हो। प्रदेश में रेत खनिज के नियमन हेतु म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 प्रभावशील है। इस नियम के प्रावधान के तहत 33 जिलों में आम नीलामी के माध्यम से 5 वर्ष की अवधि के लिये कलेक्टर द्वारा खदानें नीलाम की गई हैं। अधिनियम की धारा 4 (1) और 4 1 ए के उल्लंघन के लिये 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है और तो और इसमें कम से कम 2 साल से बढ़ाकर 5 साल तक कि सजा का भी प्रावधान रखा गया है। 

सजा क्या है

कोई भी व्यक्ति धारा 4 की उप धारा (1) या उप धारा 1 ए के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा उसे 5 वर्ष तक का कारावास एवं 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। रेत खदानों में प्रदूषण नियंत्रण वायु और जल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होती है। जो पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का पालन सुनिश्चित करता है। विभाग पानी के छिड़काव, डस्ट-मास्क, भारी मशीनों पर रोक, खनन गहराई नियमों के माध्यम से प्रदूषण को नियंत्रित भी करता है। 

क्या - क्या रोका जा सकता है

वायु प्रदूषण के तहत खनन क्षेत्र में धूल, दमन के लिये टैंकरों से पानी का नियमित छिड़काव अनिवार्य है जो उमरिया जिले में कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है तथा मशीनरी पर नियंत्रण भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग करेगा। नदी तट पर पोकलैन जैसी भारी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, केवल मैनुअल या हल्के वाहनों की अनुमति होगी लेकिन कलेक्टर की मौन स्वीकृति और खनिज विभाग की अनदेखी के कारण उमरिया जिले की हर खदान में पोकलैन मशीनें भी लगी हुई है यहां तक उन्होने नदी के बीच में रास्ता भी बना लिया है।  पर्यावरणीय मंजूरी ईसी के अनुसार  केवल तीन मीटर या नदी की चौड़ाई कि 10 प्रतिशत से कम गहराई तक खनन किया जा सकता है। पर चांदी के चंदसिक्कों में बिका प्रशासन अगर वास्तविकता में इन खदानों की नाप करेगा तो कहीं न कहीं निश्चित मानक को दरकिनार करते हुये उत्खनन का कार्य भी किया जा रहा है।  रेत के पविहन में धूल को रोकने के लिये रेत से भरे वाहनों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य है। सीसी टीवी कैमरों और वजन पुलों का भी सुझाव दिया गया है। 

बेअसर हैं शिकायतें

मानपुर क्षेत्र में विगत दिनों कुछ ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया था, लेकिन कलेक्टर और खनिज विभाग की मौन स्वीकृति के चलते महाकाल पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई थी, जबकि अवैध खनन या प्रदूषण की शिकायत सबसे पहले कलेक्टर या डीएमओ को ही की जाती है। लेकिन इन सारे मामलों को रद्दी की टोकरी में डालते हुये उस आंदोलन भी दमनकारी नीति अपना ली गई थी। यह भी कहावत चरितार्थ है कि जब सईयंा भये कोतवाल तो डर काहे का। जब कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ही कुछ नहीं करना चाहते तो फिर कौन कार्यवाही करेगा। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी कहीं न कहीं टॉरगेट पूरा करना है।

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