उमरिया जिला पड़ा थोड़ी, इसलिये शहडोल जिले में कर रहे चोरी
महाकाल : नदी की धार नहीं, पूरे जिले का बंटाढार
उमरिया जिले के सैकड़ों एकड़ आराजी क्षेत्र में रेत खदानों के नाम पर जीवनदायिनी नदियों की सांस रोककर अंधाधुंध अवैध कमाई में जुटे महाकाल मिनरल्स कंपनी ने स्थानीय चोरकटों के दिव्य प्रकाश में जंगल, पहाड़ ही नहीं पूरे जिले के बंटाढार की रूपरेखा तय कर ली है। एक जिले की खदानों से पेट नहीं भरा तो कंपनी के पाले हुए स्थानीय कर्ताधर्ताओं ने पड़ोसी शहडोल जिले में अपना गुल खिलाना शुरू कर दिया और सुनहरी रेत के लिये उड़ते हरे पत्तों के दिव्य प्रकाश में वर्दी की आंखें भी चौंधिया उठीं हैं। यही वजह हैं कि न सिर्फ उमरिया बल्कि शहडोल जिले की सोन जैसी बड़ी नदी की सांसें भी थमने वाली हैं और जिम्मेदारों ने हरित क्रांति की बजाय हरियाली संग्रहण को ही अपना परम कर्तव्य मान लिया है। यदि यही आलम रहा तो न सिर्फ उमरिया बल्कि शहडोल जिले का बंटाढार भी तय है।
अनिल द्विवेदी
शहडोल। मध्यप्रदेश की नई खनिज नीति के तहत एक जिले की सभी रेत खदानें एक ही खनन कंपनी को ठेके पर दिये जाने का प्रावधान किया गया है। इस नीति के तहत शहडोल जिले की खदानें सहकार ग्लोबल एवं उमरिया जिले की खदानें महाकाल मिनरल्स नामक ठेका कंपनियों को लीज पर दिया गया था। सहकार ग्लोबल तो एक साल में ही पलायन कर गई लेकिन महाकाल मिनरल्स नामक कंपनी उमरिया जिले में डटी रही और विस्तारवादी नीति अपनाते हुए सहकार ग्लोबल को पूर्व में एलॉट शहडोल जिले की रेत खदानों से रेत चोरी का धंधा शुरू कर दिया। उमरिया जिले के नदी नालों से निकलने वाली रेत से पेट नहीं भरा तो जंगल पहाड़ों तक को नहीं बख्शा गया और वह भी कम पड़ा तो शहडोल जिले की खदानों में मुंह मारना शुरू कर दिया गया। नियम-कायदों को धता बताकर किये जा रहे रेत खनन के इस अवैध कारोबार में खाकी और खादी का संरक्षण मिलने की भी चर्चा आम जुबान पर है।
जिले में हैं 26 खदानें
मध्यप्रदेश शासन और खनिज विकास निगम द्वारा उमरिया जिले की 26 खदानें रेत खनन हेतु महाकाल मिनरल्स को आवंटित की गई हैैं, जिनका रकबा कई हेक्टेयर है। स्वीकृ त खदानें और उनका रकबा इस प्रकार हैं- तहसील चंदिया के ग्राम नरवार ख. नं. 352 रकबा 2.780 हे., खैरभार ख. नं. 75 रकबा 3.414, झाला ख. नं. 75 रकबा 3.414, टेकन ख. नं.1 रकबा 3.414, अतरिया 1 रकबा ४.०००, खैरभार -2 ख. नं. 5 रकबा6.981, कोयलारी ख. नं. 07 रकबा 5.260, बहेरघट ख. नं. 53 रकबा 1.424, तहसील पाली ग्राम करकटी ख. नं.36 रकबा 2.023, तहसील बांधवगढ़ खेरवाखुर्द ख. नं.201/248 रकबा 4.614, तहसील बिलासपुर ग्राम झिलमिली ख. नं.02, 08, 32 रकबा 4.178 तहसील मानपुर ग्राम गोवर्दे, बडार ख.नं. 1191 व 1 रकबा 1.500,बटुरावाह ख. नं. 252 रकबा 1.704, मझौली ख.नं. 24/192 रकबा 2.064, मुडेहना ख. नं. 15 रकबा 2.845,अमिलिहा ख. नं. 1/601 रकबा 4.000, सलैया ख. नं. 807 रकबा 4.925, पडवार ख. नं. 666, 701 रकबा 4.992, गोवर्दे ख.नं. 566/1226 रकबा 9,500, मोहबला ख. 317/384 रकबा 10.110, मुडगुडी ख. नं. 263, 350 रकबा 6.000 चंसुरा ख.नं. 61 रकबा 1.300, पिटौर ख. 107 रकबा 3.500, सुखदास ख.नं. 1/2 रकबा 4.033, भमरहा ख.नं. 1005/1008, रकबा 6.11ख.नं. 442/1007/1, कोडार ख.नं. 29/1 व 29/2 रकबा 5.744 हे. है।
नीति नहीं नीयत में खोट
शासन द्वारा जिस नीति के तहत महाकाल मिनरल्स को उमरिया जिले की रेत खदानों से खनन का अधिकार दिया गया है वह सभी जिलों में लागू है। ठेक ा कंपनियां अपने निर्धारित क्षेत्र में खनन कर शासकीय नीति-नियमों के तहत कार्य कर रही हैं लेकिन महाकाल मिनरल्स स्थानीय चाटुकार टाइप के छुटभैयों की आड़ में बड़े पैमाने पर निर्धारित क्षेत्र के बाहर रेत खनन का कार्य किया जा रहा है। राजस्व क्षेत्र के नदी नालों ही नहीं वन क्षेत्र में भी रेत के खनन के आरोप लगते रहे हैं। कई बार शासन प्रशासन के नुमाइंदों को अवगत कराया गया लेकिन स्थानीय चाटुकारें के भ्रमित करने व कथित अर्थिक प्रलोभन के चलते कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी। कंपनी के कर्ताधर्ताओं की नायत में खोट के रंग में रंगी महाकाल कंपनी कथित तौर पर शासन को करोड़ों का चूना लगा डाला और लोगों को भनक भी नहीं लगी।
सफेदपोश का नाम चर्चा में
जिले में अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ब्यौहारी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत पोंड़ी कला के ग्रामीणों ने गत माह उमरिया जिले की रेत ठेकेदार कंपनी महाकाल मिनरल्स के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ओवरलोड रेत से भरे ट्रकों को रास्ते में रोक दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि महाकाल मिनरल्स कंपनी जिला सीमा के बाहर आकर शहडोल जिले के रेउसा घाट क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी द्वारा भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों का उपयोग कर खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को क्षति और ग्रामीण सडक़ों पर हादसों का खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस अवैध उत्खनन की शिकायत पहले भी प्रशासन को दी गई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण वे आंदोलन करने को मजबूर हुए। उनका कहना है कि ओवरलोड रेत वाहनों की लगातार आवाजाही से सडक़ें जर्जर हो रही हैं और नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। आलम यह है कि कंपनी के छुटभैयों के दिव्य प्रकाश में महाकाल कंपनी न सिर्फ उमरिया बल्कि शहडोल जिले का भी बंटाढार करने पर आमादा है और शासन-प्रशासन के ओहदेदारों ने चुप्पी साध रखी है जो संभवत: संभाग की अस्मिता को तार-तार करने से भी नहीं चूकेगी।
प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों में नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि पिछले दिनों प्रशासन द्वारा 11 हाईवा ओवरलोड वाहनों को खड़ा कर चालान और भारी जुर्माना किया गया था, लेकिन उसके बाद ओवरलोड गाडिय़ों की संख्या और बढ़ गई। स्थानीय चर्चा के अनुसार, कार्रवाई केवल ‘सेटिंग’ के उद्देश्य से की गई थी और बाद में अवैध खनन पहले से अधिक तेजी से शुरू हो गया। जन चर्चा यह भी है कि इस पूरे प्रकरण में जिले के एक अधिकारी के साथ एक स्थानीय सफेदपोश नेता भी जुड़े बताए जा रहे हैं, जो कार्रवाई करवा कर कुछ दिनों के लिए वाहनों को बंद करवाते हैं और बाद में ‘सेटिंग’ होने पर पुन: खनन और ओवरलोडिंग शुरू करवा देते हैं।
धमकी बाजी से भी नहीं चूकते
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वे लगातार प्रशासन और पुलिस को जानकारी दे रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। प्रदेश सरकार अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के दावे करती है, जबकि शहडोल सीमा के आसपास अवैध उत्खनन उमरिया की रेत कंपनी द्वारा खुलेआम किया जा रहा है। इस पर न तो जिला प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि कोई कार्रवाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि स्थानीय विधायक से लेकर सांसद तक सभी चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों ने अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और रेत भरे ओवरलोड वाहनों के संचालन को बंद कराने की मांग की है।

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