बारात घरों में शादी का तामझाम, रास्ते में जान लेवा जाम
हेलमेट में समाए प्रभारी, ध्वस्त यातायात शहर की लाचारी
" एक संजय दिव्य दृष्टि धारी थे जिन्होंने कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध का लाइव टेलीकास्ट किया और दूसरे संजय यातायात प्रभारी हैं जो शहर का यातायात भी ठीक ढंग से नहीं देख पा रहे हैं। शहडोल जैसे छोटे और पिछड़े शहर में घंटों जाम का झाम फंसे और कोतवाली थाना पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़े तो यातायात प्रभारी और स्टाफ पर सवाल उठना लाजिमी है। जाम के झाम के दौरान यदि अचानक कोई बीमार पड़ जाए तो उसे काल के विकराल गाल में समाने से कोई नहीं बचा सकता क्योंकि इस बात की गारंटी है कि अस्पताल तो वह किसी कीमत पर नहीं पहुंच सकता है। "
शहडोल। संभाग मुख्यालय ने बदलते वक्त के साथ काफी कुछ तरक्की की है। इन्हीं में से एक शहर में मैरिज गार्डन और बारात घरों की संख्या में बढ़ोत्तरी है। संपन्न वर्ग के लोगों ने बड़ी पूंजी फंसा कर बारात घर या मैरिज गार्डन का संचालन तो शुरू कर दिया लेकिन वहां तक आने-जाने वाले लोगों को होने वाली असुविधा पर शायद गौर नहीं किया और यही वजह है कि अब कई ऐसे मैरिज गार्डन है जहां किसी वैवाहिक या अन्य कार्यक्रम में पहुंचना लोगों को अत्यंत कठिन लग रहा है।
पार्किंग का अभाव
संभाग मुख्यालय में जितने भी मैरिज गार्डन या बरात घर संचालित हैं उनमें से कुछ को अपवाद मांग ले तो किसी के पास भी पार्किंग की सुविधा नहीं है मैरिज गार्डन में आने वाले लोगों के वहां सड़कों के किनारे खड़े होते हैं जिनकी संख्या बढ़ाते बढ़ाते लोगों के आवागमन को बाधित करने लगती है और वही जाम लगने लगता है। शासन प्रशासन द्वारा मैरिज गार्डन संचालन की अनुमति देते समय शायद सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी शर्त, पार्किंग पर ध्यान नहीं दिया जाता और यह छोटी सी लापरवाही शहर वासियों के लिए कभी खत्म न होने वाली समस्या बन जाती है जिसका सामना आज संभाग मुख्यालय कर रहा है।
जाम बेलगाम
रिफ्यूजी कॉलोनी-कोतवाली तिराहे से लेकर अंडर ब्रिज तक लगने वाले जाम ने तो बड़े-बड़े शहरों के जाम को भी पीछे छोड़ दिया है। इस मार्ग पर तीन-चार मैरिज गार्डन है। जिस दिन विवाह मुहूर्त होता है उस दिन इस मार्ग के किनारे रहने वाले लोगों और आवागमन करने वाले वाहन चालकों की फजीहत देखने लायक होती है। भारती पैलेस, संस्कार पैलेस जैसे बड़े मैरिज गार्डन में वैवाहिक समारोह होने पर इस मार्ग में कई-कई घंटे वाहन जाम में फंसे रह जाते हैं। हालत ऐसी हो जाती है कि मोहल्ले में यदि कोई बीमार पड़ जाए या आपात स्थिति उत्पन्न हो तो किसी को अस्पताल तक नहीं पहुंचा जा सकता भले ही उसकी जान चली जाए।
नियंत्रण की व्यवस्था नहीं
जाम की स्थिति पर काबू पाने की कोई व्यवस्था पुलिस या प्रशासन द्वारा नहीं किया जाना किसी बड़े गंभीर हादसे की आशंका को भी बलवती करता है। पिछले दिनों ऐसा ही एक वाक्य देखने को मिला जब कई घंटे तक वाहन फंसे रहे ना कोई जा सकता था, न आ सकता था... पता नहीं कैसे कोतवाली पुलिस को इस बात की जानकारी मिली और पुलिस बल ने आकर धीरे-धीरे करके बड़ी मुश्किल से वाहनों को निकलवाना शुरू किया। सवाल यह उठता है कि ऐसे हालात में यदि अचानक कोई अस्वस्थ हो जाए तो क्या होगा। कोई एंबुलेंस या अन्य वाहन भी मरीज को अस्पताल नहीं पहुंचा सकता है यानी मरीज की मौत अटल है।
प्रभारी को निंदिया प्यारी
सबका यह मानना है शहडोल संभाग मुख्यालय एक छोटा और पिछड़ा शहर है लेकिन इतना भी छोटा नहीं है की यहां यातायात विभाग न हो। जिला पुलिस ने बकायदा यातायात अमला तैनात कर रखा है। यातायात थाना भी है, और प्रभारी भी। यातायात विभाग की जिम्मेदारी है शहर की यातायात को व्यवस्थित और जनोपयोगी बनाना लेकिन शहडोल जिले का यातायात विभाग सिर्फ शहर के बाहरी मार्ग पर हेलमेट चेकिंग के अलावा कोई जिम्मेदारी निभाना शायद जानता ही नहीं है।जब तब वाहनों के चालान की खबरें छपवाकर अपनी पीठ थपथपाने वाले यातायात विभाग और उसके प्रभारी को शहर की यातायात समस्या से कोई लेना देना नहीं है। यही वजह है कि सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहन आवागमन को बाधित करते हैं तो कहीं घंटे जाम लगा रहता है और यातायात प्रभारी को इसकी भनक भी नहीं लगती है। अंडर ब्रिज रोड पर लगने वाला जाम हो या बुढार रोड में स्थित बारात घरों के सामने बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम हो, यातायात अमले को इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है उन्हें सिर्फ चालानी कार्यवाही कर अपने आकाओं को खुश करना है। शहर की जनता, शहर का यातायात और वाहन चालक किन परेशानियों से जूझ रहे और उसका समाधान कैसे होगा यह सोचने की तो फुर्सत ही नहीं है, हो भी कैसे वह कोई महाभारत के संजय थोड़ी हैं कि दिव्य दृष्टि प्राप्त हो, वह सिर्फ यातायात के प्रभारी हैं और उन्हें सुख निंदिया प्यारी है।
स्थाई समाधान जरूरी
वैवाहिक आयोजनों के समय शहर के विभिन्न भागों में संचालित मैरिज गार्डन और बारात घर के सामने लगने वाले जाम के साथ ही अंडर ब्रिज रोड के महा जाम जैसी समस्याओं के स्थाई समाधान पर जोर दिया जाना जरूरी है। जितने भी बारात घर संचालक हैं उन्हें पार्किंग व्यवस्था बनाने और न बनाने पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही किए जाने की जरूरत है। साथ ही अंडर ब्रिज मार्ग पर लगने वाले जाम से निपटने और लोगों को राहत दिलाने के लिए एकांगी मार्ग बनाए जाने की जरूरत को नहीं नकारा जा सकता है। यदि वैवाहिक आयोजनों के समय जब भीड़भाड़ अधिक होती है इन मार्गों को एकांगी कर दिया जाए तो शायद जाम की समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है इससे वाहन चालकों को तो राहत मिलेगी ही इस मार्ग और क्षेत्र में रहने वाले लोगों को असमय मौत की आशंका जैसी स्थितियां उत्पन्न होने से बचाया जा सकता है।

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