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किसका कितना मन डोला, बता देगा नवा टोला


 ठेकेदारों से उपयंत्री की सांठ-गांठ ने खोले ग्रामीण विनाश के द्वार

 शहडोल। गांव का विकास गांव के लोगों के जरिये कराने के उद्देश्य से लागू पंचायत राज प्रणाली जयसिंहनगर जनपद क्षेत्र में मजाक बन कर रह गई है। त्रिस्तरीय पंचायतराज में ग्रामीण विकास को गति देने के लिये संविधान में संशोधन क र पूरा सेटअप तैयार किया गया यहां तक कि तकनीकी त्रुटियों से बचाव के लिये इंजीनियरों तक की नियुक्ति की गई लेकिन वही इंजीनियर अब ग्रामीण विनाश की धुरी बनते जा रहे हैं। चंद रुपयों के लिये अपना ईमान गिरवी रख देने वाले कतिपय इंजीनियरों ने अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की सीमाएं लांघ दी हैं जिसकी बानगी जयसिंहनगर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत नवाटोला में देखी जा सकती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नवा टोला में 15 वें वित्त और मनरेगा के तहत दो अलग-अलग स्थानों पर पुलिया निर्माण किया गया है। सूत्रों की मानें तो पांच-पांच लाख रुपये की लागत से निर्मित उक्त पुलियों की वास्तविक लागत पचास हजार से अधिक नहीं है लेकिन निर्माण एजेंसी ने स्वीकृत पांच लाख रुपये का बिल लगा कर राशि आहरित कर कथित ठेकेदार  नुमा सत्ता के दलालों को सौंप दिया। स्वीकृत राशि का सबसे बड़ा हिस्सा ठेकेदार  और इंजीनियर  के कथित पोषण का आधार बन गया। हालांकि उक्त निर्माण कार्य दो पृथक ठेकेदारों ने कराए लेकिन इंजीनियर एक यानी आशुतोष चतुर्वेदी हैं जिन पर क्षेत्रीय ग्रामीणों द्वारा अनेक गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सूत्रों की मानें तो अवैध धनार्जनके साथ ही जनपद में प्रभुत्व की चाहत रखने वाले उक्त इंजीनियर के प्रभार वाले गांवों के लोग ही नहीं उनकी बिरादरी के लोग भी दबी जुबान बहुत कुछ कहते-सुनते देखे जा रहे हैं। आरोपों पर यदि यकीन किया जाए तो उक्त इंजीनियर द्वारा ग्रमीण क्षेत्र में कराए गए निर्मा कार्यों का  मुल्यांकन मौके पर जाकर नहीं बल्कि कमीशन का चौका मार कर किया जाता है। यही वजह है कि नवा टोला में चंद रुपयों में निर्धारित मानकों और  गुणवत्ता के विपरीत निर्मित पुलियों का इंजीनियर आशुतोष ने न सिर्फ मूल्यांकन कर दिया बल्कि कथित तौर पर सीसी भी जारी कर दी गई या कर दी जाएगी।
विकास के नाम पर विनाश
जयसिंहनगर जनपद पंचायत में उपयंत्री के पद पर वर्षों से पदस्थ आशुतोष चतुर्वेदी मौजूदा समय में न सिर्फ अपनी मनमानी, भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता के लिये समूचे जनपद क्षेत्र में चर्चित हैं बल्कि ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी बाधा के रूप में अपनी पहचान बनाते नजर आ रहे हैं। उक्त उपयंत्री द्वारा अब तक जितने भी ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य कराए गए या कार्यों के मूल्यांकन पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने के कार्य किये गए उनकी यदि जांच कराई जाए तो प्रथम दृष्टया ही यह साबित होने में समय नहीं लगेगा कि गांवों में निर्माण और विकास कार्यों में किस हद तक अनियमितताएं बरत कर अवैध कमाई का साम्राज्य खड़ा किया गया है। अवैध कमाई और मनमानी की इस दौड़ में शामिल उपयंत्री के कमाल का नतीजा यह है कि  जनपद जयसिंहनगर जनपद क्षेत्र के वह गांव जो चतुर्वेदी के  प्रभार में हैं वहां विकास के बजाय विनाश की गाथा लिखी जा रही है।
दर्जनों गांव सैकड़ों काम
प्राप्त जानकारी के अनुसार इंजीनियर आशुतोष चतुर्वेदी पिछले कई सालों से इसी जनपद क्षेत्र में कार्यरत हैं। हालांकि बीच-बीच में उनका सेक्टर भी अन्य उपयंत्रियों की तरह बदलता भी रहा है लेकिन वह जहां भी जिस सेक्टर में पदस्थ रहे वहां हमेशा अपनी मर्जी ही चलाई है। मौजूदा समय में भी उक्त इंजीनियर के प्रभार में करीब एक दर्जन गांव हैं जहां सैकड़ों बड़-छोटे निर्माण और विकास कार्य कराए गए हैं लेकिन उन निर्माण कायों की उपयोगिता और भविष्य को लेकर एक भी  सकारात्मक टिप्पणी सामने नहीं आई है। बताया जाता है कि  उनके अपने चहेते ठेकेदार हैं जो निर्माण कार्यों में व्यापक अनियतिताएं बरतते और अंधाधुध अवैध कमाई करते रहे और अपना और उपयंत्री का भला करते रहे हैं। जानकार सूत्रों की मानें तो वह जिन-जिन सेक्टरों में कार्यरत रहे हैं उनमें कराए गए निर्माण कार्यों की जांच कराई जाए तो करोड़ों के भ्रष्टाचार के उजागर होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है। 

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