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रूठी बुआ को मना ही लाई अम्मा, ईमानदारी से निभाया शादी का जिम्मा

 जयसिंहनगर में लिखी गई सामूहिक विवाह की कहानी, 

समधी ने की समधिन की अगुवानी

फूफा तो रहे नहीं, फुआ ने निभा दी जिम्मेदारी


स्थानीय संस्कृति के अनुरूप शादी हो और फूफा नाराज नहों तो शादी, शादी नहीं मानी जा सकती ऐंसी आम धारणा है। तात्पर्य यह कि घराती हों या बाराती कितनी ही अच्छी व्यवस्था क्यों न कर लें लड़के का फूफा किसी न किसी बात को लेकर नाराज हो ही जाता है। वर्षों पुरानी लोक परंपरा का निर्वहन मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह के अवसर पर भी हुआ, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां नाराजगी फूफा की नहीं बल्कि फुआ की झेलनी पड़ी। फुआ ने हालांकि अपनी नाराजगी का प्रदर्शन करने में कोई कमी नहीं की लेकिन विवाहोत्सव का आयोजन करने वाली अम्मा ने स्वयं को कुशल ग्रहणी या प्रशासक सबित करते हुए अंतत: फुआ को मना ही लिया और राजी-खुशी के साथ सामूहिक विवाह संपन्न हो गया। इस आयोजन में वर पक्ष के अभिभावक के रूप में जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र की विधायिका ने समधिन की भूमिका निभाई तो कन्या पक्ष के अभिभावक के रूप में ब्यौहारी विधायक शरद कोल ने समधी की भूमिका निभाई और इस प्रकार समधी ने समधिन की अगुवानी कर पिता या अभिभावक की भूमिका का निर्वहन किया।
अनिल द्विवेदी 
शहडोल। जिले के जयसिंहनगर जनपद पंचायत मुख्यालय में बुधवार को मख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह याजना के तहत दो सौ युगलों ने दाम्पत्य जीवन में प्रवेश किया। मुख्यकार्यपालन अधिकारी शिवानी जैनकी अगुवाई और देख-रेख में आयाजित इस वैवाहिक आयोजन की विशेषता यह रही कि अन्य कार्यक्रमों की भांति फर्जी आवेदकों या पूर्व में ही विवाहित ग्रामीण युगलों को दोबारा विवाह कर शासकीय योजना का  अनुचित लाभ उठाने का अवसर नहीं मिल पाया और पूरा कार्यक्रम मुख्यमंत्री की मंशा और शासन के निर्देशों के अनुरूप निर्विघ्र संपन्न हो गया।


मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह/निकाह योजनांतर्गत जनपद मुख्यालय जयसिंहनगर के पुलिस मैदान में जनप्रतिनिधियो एवं अधिकारियो की उपस्थिति में सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम बड़े उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। सामूहिक कन्या विवाह के अवसर पर 200 नव दंपत्तियो ने वैदिक मंत्रोच्चरण एवं भारतीय परंपरा के साथ सात फेरे लेकर परिणय सूत्र में बंधे। विधायक श्रीमती मनीषा सिंह,विधायक श्री शरद कोल, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियो एवं अधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर उनके सुख, समृद्धि और मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की।
समरसता का प्रतीक: मनीषा
कार्यक्रम को सम्बोंधित करते हुए विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने कहा कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से जहां एक ओर विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का भी सशक्त संदेश दिया जा रहा है। सामूहिक कन्या विवाह सामाजिक समरसता और सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने विवाह संस्कार को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि सामूहिक विवाह से अनावश्यक खर्चों में कमी आती है और सभी को अपनी खुशियां साझा करने का अवसर मिलता है।


सामाजिक एकता को मजबूती: शरद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री शरद कोल ने कहा कि सामूहिक कन्या विवाह समारोह का उद्देश्य समाज में सादगीपूर्ण एवं आदर्श विवाह को बढ़ावा देना तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से एक ही मंच पर अनेक जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जाता है, जिससे सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है। कार्यक्रम को सदस्य जिला योजना समिति श्रीमती अमिता चपरा सहित अन्य जनप्रतिनिधियो एवं अधिकारियो ने भी सम्बोंधित किया। कार्यक्रम के दौरान नवदंपतियों को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता के प्रतीक स्वरूप चेक एवं गृहस्थ जीवन की आवश्यक सामग्री प्रदान की गई, जिससे वे अपने नए जीवन की शुरुआत सुगमता से कर सकें।
रूठ गई फुआ
स्थानीय लोक परंपराओं में संपन्न होने वाली शदियों के दौरान लड़के के फूफा के नाराज होने का अपवाद तकरीबन सभी जगह देखने को मिलता रहा है। इस सामूहिक विवाह में भी यह अपवाद कुछ हद तक देखा गया। अंतर यह था कि यहां फूफा तो कोई था ही नहीं इसलिये जनपद अध्यक्ष श्रीमती मालती सिंह ने ही फुआ बनकर फूफा की जिम्मेदारी निभा दी  यानि जनपद अध्यक्ष श्रीमती सिंह सामूहिक विवाह आयोजन की व्यवस्था को लेकर काफी हद तक नराज हो उठीं और कार्यक्रम में सहभागिता निभाने से स्पष्ट मना कर दिया। आयोजन स्थल और पंडाल में अतिथियों का आगमन हो चुका था, बार-बार जनपद अध्यक्ष को माइक से मंच पर आने को आमंत्रित किया जा रहा था लेकिन फआ तो एक बार रूठ गई तो रूठ ही गई। आयोजक मंडल के लोगों में दहशत की झलक स्पष्ट देखी जा सकती थी। किसी को कुछ भी  समझ में आता और बात का बतंगड़ बनता इसके पूर्व ही जयसिंहनगर जनपद की सीईओ शिवानी जैन ने बारात का स्वागत करने वाले घरातियों की अम्मा की भमिका निभाते हुए रूठी हुई फआ यानि जनपद अध्यक्ष को किसी तरह मना ही लिया और उन्हें मंच के करीब ले आई। हालांकि फुआ या फूफा की भूमिका निभा  रहीं जनपद अध्यक्ष ने सामूहिक विवाहोत्सव में सहभागिता तो निभाई लेकिन अपनी नराजगी को जायज ठहराने और उसे बरकरार रखने के लिये समधी के साफे को धारण नहीं किया।


अम्मा की होती रही प्रशंसा
निर्वाचित राजनीतिक प्रतिनिधि की नाराजगी कोई साधारण बात नहीं मानी जा सकती है। एक जिम्मेदार और गंभीर निर्वाचित प्रतिनिधि का नाराज होना इस बात का प्रमाण हो सकता है कि कुछ तो ऐसा हुआ जो नहीं होना चाहिये था अन्यथा श्रीमती मालती सिंह क्यों नाराज होतीं। उनकी नाराजगी अपनी जगह है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण जनपद जयसिंहनगर की सीईओ शिवानी जैन की सूझबूझ और अपनेपन के साथ अध्यक्ष को मनाकर कार्यक्रम में सहभागिता के लिये तैयार करने का प्रयास न सिर्फ सफल बल्कि सराहनीय माना गया है। स्थानीय ग्रामीण परिवारों के लोगों, वर-वधू के परिजनों और जनपद के अधिकारी कर्मचारी सीईओ की समझदारी और एक सफल आयोजक के रूप में उनकी भूमिका की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।

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