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नवाटोला में मन डोला तो सीईओ ने जांच का पन्ना खोला

 इंजीनियर आशुतोष चतुर्वेदी के कारनामों की जांच पड़ताल शुरू

 नवाटोला से शुरू होकर किन-किन पंचायतों में पहुंचेगी जांच की आंच

 ग्राम पंचायत कुदारी में भी दिख रहा कमाल


" जयसिंहनगर जनपद पंचायत की एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में तकनीकी मार्गदर्शन एवं निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही मूल्यांकन करने के लिए तैनात उप यंत्री आशुतोष चतुर्वेदी के कथित भ्रष्टाचार एवं निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की लंबी फेहरिश्त को देखते हुए सीईओ जनपद पंचायत जयसिंहनगर ने उनके कामों की निगरानी और भ्रष्टाचार की जांच का अभियान शुरू कर दिया है। बहुचर्चित नवा टोला ग्राम पंचायत में पुलिया निर्माण के नाम पर हुए लाखों के भ्रष्टाचार की पुष्टि के लिए सीईओ शिवानी जैन ने गत दिनों मौके पर जाकर वस्तु स्थिति का पता लगाया और अब यह माना जा रहा है कि जांच का यह सिलसिला जो नवा टोला से शुरू हुआ है शेष पंचायतों में भी फैलता जाएगा और अंततः आशुतोष की तमाम कारस्तानियों का खुलासा होकर रहेगा। "


शहडोल। जयसिंह नगर जनपद पंचायत के नवा टोला ग्राम पंचायत में 15 वें वित्त और आदिवासी विकास मद से दो पुलियों का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया है। यूं कहने को तो निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत ही है, लेकिन असल में निर्माण कार्य ठेकेदारों द्वारा कराया गया है। इन ठेकेदारों में कुछ तो सांसद विधायक के चाहते हैं तो कुछ इंजीनियर के लाड़ले हैं। यही वजह है कि ठेकेदारों के मनमानी पूर्ण कार्यों पर और उनके द्वारा बरती जाने वाली अनियमितताओं पर कोई अंकुश लगाने वाला नहीं है परिणाम स्वरूप दो अलग-अलग ठेकेदारों ने सिर्फ नवा टोला ग्राम पंचायत में ही लाखों डकारने का करनामा कर दिखाया है। उस पर भी आश्चर्य की बात यह है कि उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा मूल्यांकन कर राशि जारी करवाने में पूर्ण सहयोग कर अपने संरक्षण का खुला प्रमाण प्रस्तुत किया है।

कुदरी में प्यादा 

जयसिंहनगर की ग्राम पंचायत कुदरी भी काफी चर्चित है। कहा जाता है कि कुदरी में सचिव कोई रहे, लेकिन हुकूमत पूर्व ग्रामीण रोजगार सहायक शीतलेश गुप्ता की ही चली है और इसकी वजह है उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी, जिसके दम पर कमीशन के बदले भ्रष्टाचार की इबारत लिखने का अभियान चलाया जा रहा है। यह भी कहा जाता है कि शीतलेश रोजगार सहायक है या ठेकेदार यह बात आज तक लोगों के गले से नहीं उतर पाई है लेकिन एक बात जरूर स्पष्ट है कि शीतलेश अप यात्री आशुतोष का एक प्यादा बनकर रह गया है । एक के बाद एक कारनामें कर शीतलेश ने अमझोर, कुदरी और समीपी ग्राम पंचायतों में उपयंत्री के सहयोग से भ्रष्टाचार की जो इमारत खड़ी की है वह समूचे जनपद क्षेत्र की छवि पर ग्रहण लगाने के लिए काफी है।

आशुतोष का अपना कानून 

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कुदरी में प्रेमलाल अहिरवार के खेत के पास 4 साल पहले पुलिया का निर्माण किया जाना था, लेकिन अपनी मनमर्जी के मालिक शीतलेश गुप्ता द्वारा यह पुलिया दूसरी जगह बनादी गई , न तो इसमें ड्राईंग चेंज हुई, ना ही जगह परिवर्तन की कोई लिखा-पढ़ी हुई और लगभग 5 लाख रुपये की इस पुलिया का अप्रत्यक्ष रूप से ठेका शीतलेश को मिला और बेधड़क तरीके से इस पुलिया का निर्माण भी हो गया और यह पुलिया बीच बस्ती में इमली के पेड़ के पास बना भी दी गई, आश्चर्य की तो बात तो यह है कि ग्राम पंचायत कुदरी का प्रभार देख रहे उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा उक्त कार्य का मूल्यांकन भी कर दिया गया और भुगतान ठेकेदार को प्राप्त हो गया। सवाल यह उठता है कि जब तकनीकी स्वीकृति एवं प्रशासकीय स्वीकृति अन्य स्थान के लिए प्राप्त हुई तो ठेकेदार ने जो गांव का ही रहने वाला और ग्राम पंचायत का ग्रामीण रोजगार सहायक है, ने कैसे स्थान परिवर्तित कर पुलिया का निर्माण कर दिया। जाहिर है कि अपने प्रभाव वाले ग्राम पंचायत में उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी ग्रामीण विकास का कानून नहीं अपना खुद का कानून चल रहे हैं यही वजह है कि जहां देखो वही निर्माणकार्य में भ्रष्टाचार और बिना काम के राशि निकालने का कारोबार बदस्तूर जारी है।

दांव पर जनपद की साख

शासन द्वारा स्वीकृत निर्माण राशि के भूखे ठेकेदारों और उपयंत्री की जुगलबंदी ने पूरे जयसिंहनगर जनपद क्षेत्र को भ्रष्ट साबित करने का प्रयास किया है जिसकी जानकारी अब जनपद पंचायत के सीईओ को भी हो चुकी है और उन्होंने भ्रष्टाचार की परतों को उधेड़ना शुरू भी कर दिया है।

गेट अधूरा, पैसा निकल गया पूरा

इसी प्रकार एक और मामला ग्राम पंचायत कुदरी में भी सामने आया। वर्ष 2021 में एक गेट का निर्माण किया जाना था लेकिन अगर पंचायत के ऑकड़ों को खंगाला जाये व कैशबुक को गंभीरता से टटोला जाये तो इस गेट निर्माण में लगभग 3 लाख रुपयों की राशि पूरी निकाल ली गई और यह गेट आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। किस सप्लायर के नाम से बिल बना, किसने खेला खेल, यह बात भी सामने है। ऐसा कहा जाता है कि अप्रत्यक्ष रूप से इस गेट के निर्माण को भी शीतलेश ने ही अंजाम दिया है। वही सप्लायर वही ठेकेदार और उसका आका मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार कुल मिलाकर ऐसा खेल खेल गया कि लाखों पर हो गए और किसी को भनक भी नहीं लगी जबकि अधूरा गेट आज भी ग्राम पंचायत और ग्रामीण विकास की पोल खोलता नजर आ रहा है।

पेवर बलाक घोटाला 

 सूत्रों के माने तो उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी ने ग्राम पंचायत कुदरी में ही अपने चहेते ठेकेदार शीतलेश को अनुचित लाभ दिलाने की मंशा से ग्राम पंचायत कुदरी मे पेवर ब्लाक लगाने के काम का मूल्यांकन भी कर दिया और राशि भी निकल गई जबकि निर्माण स्थल पर देखने से यह स्पष्ट हो जाएगा की क्या और कितना काम हुआ तथा राशि कौन कैसे निकाल कर डकार गया। उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी के प्रभाव वाले ग्राम पंचायत में जितनी राशि जहां खर्च दर्शाई गई है अगर उस राशि का मूल्यांकन सही तरीके से किया जाये तो सारी की सारी हकीकत सामने आ जायेगी।

डेढ़ दशक से गड़ा है खूंटा 

 जानकार सूत्रों की माने तो उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी जयसिंहनगर जनपद पंचायत में तकरीबन 13 वर्षों से कार्यरत हैं। अलग-अलग सेक्टरों में भले ही उनका ट्रांसफर हुआ हो लेकिन जयसिंहनगर जनपद पंचायत से बाहर उन्हें कोई नहीं भेज सका। तीन पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान कई उप यंत्रियों के स्थानांतरण इस जनपद से उस जनपद, इस जिले से उस जिले में हुए लेकिन मजाल क्या है कि कोई उपन्यत्री आशुतोष चतुर्वेदी को हिला भी पाया हो। सूत्रों की माने तो जोड़-तोड़ और जुगाड़ में माहिर इस उपन्यत्री ने अब तक जयसिंहनगर जनपद में आने वाले सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अपने मोह जल में फसाने में सफलता अर्जित की है लेकिन मौजूदा सीईओ शिवानी जैन पर उनका असर नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि सीईओ शिवानी जैन ने इंजीनियर आशुतोष चतुर्वेदी के कर्मों की जांच आरंभ कर दी है और ऐसा माना जाता है कि शिवानी जैन जैसी कर्मठ और ईमानदार अधिकारी जिस कार्य में हाथ लगा दे वह पूरा ना हो ऐसा संभव नहीं है।

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