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जयसिंहनगर सीएचसी : गंदगी में ही आनंद

 अस्पताल गंदगी से बेहाल, बीएमओ मालामाल

चिकित्सकीय स्टाफ नारकीय यातना झेलने को मजबूर

बजट हो रहा पूरा खर्च, सफाई परिसर से कोसों दूर

जयसिंहनगर सिविल अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार

स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में लागू स्वच्छ भारत अभियान का जयसिंहनगर में कोई वजूद नहीं है। नगर के विभिन्न हिस्सों में फैली गंदगी को दरकिनार भी कर दिया जाए तो लोगों को विभिन्न बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कैसे इस लापरवाही के लिए क्षमा किया जा सकता है। यूं तो अस्पताल प्रबंधन को शासन से सभी आवश्यक कार्यों के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है उसमें से सफाई के लिए स्वीकृत बजट राशि आखिर कहां जाती है कौन कचरे का पैसा खा रहा है इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है हालांकि बीएमओ डॉक्टर आनंद बहादुर सिंह स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ आम लोगों को उपलब्ध करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील बताए जाते हैं लेकिन अस्पताल चिकित्सकीय आवासीय परिसर और अस्पताल परिसर में फैली गंदगी यह साबित कर रही है कि शायद नियमों को भी गंदगी में ही आनंद मिल रहा है अन्यथा ऐसी बढ़ता स्थिति का सामना आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोगों और प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र को नहीं करना पड़ता। "

अनिल द्विवेदी 7000295641

शहडोल। लोगों को बेहतर उपचार और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित जैसिंहनगर सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। अस्पताल परिसर के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से कचरे के ढेर, मेडिकल व सामान्य अपशिष्ट के बैग खुले में पड़े होने तथा जगह-जगह फैली गंदगी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों को इसी गंदगी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है, क्योंकि गंदगी और जलभराव के कारण संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यहां पहले से बीमार और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में खुले में पड़ा कचरा बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगजनक जीवाणुओं के पनपने का कारण बन सकता है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल परिसर की नियमित साफ-सफाई और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर सफाई कराई जाए और कचरे का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए तो ऐसी स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन से नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने और मरीजों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।



उधर, अस्पताल के बीएमओ डॉ. आनंद प्रकाश सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर से नियमित कचरा उठाने के लिए नगर परिषद जैसिंहनगर के सीएमओ को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है। वहीं नगर परिषद के सीएमओ ने कहा कि उन्हें हाल ही में जैसिंहनगर का प्रभार मिला है। उनके अनुसार अस्पताल की गंदगी की जानकारी मिलने के बाद कचरा वाहन भेजने के निर्देश दिए गए हैं और जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रबंधन और नगर परिषद इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता देते हैं तथा मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम कब तक उठाए जाते हैं।

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