महिला सरपंच से अभद्रता और पंचायत अधिकारों पर हस्तक्षेप के आरोपों से घिरे जिला पंचायत सीईओ
सरपंच संघ ने खोला मोर्चा, 10 दिन का अल्टीमेटम
शहडोल। जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ जिला सरपंच संघ ने दो अलग-अलग गंभीर मामलों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सीईओ को जिले से हटाने तथा पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में हस्तक्षेप करने वाले आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
पहले ज्ञापन में सरपंच संघ ने आरोप लगाया है कि 6 जुलाई 2026 को एक आदिवासी महिला सरपंच न्याय की गुहार लेकर जिला पंचायत कार्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय सीईओ ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, कार्यालय से बाहर निकाल दिया तथा दोबारा कार्यालय नहीं आने और सरपंच पद से हटाने तक की धमकी दी। ज्ञापन में इसे एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के सम्मान के विपरीत बताते हुए प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन बताया गया है।
सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सीईओ को तत्काल शहडोल जिले से हटाकर अन्यत्र पदस्थ किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर के सरपंच जिला पंचायत कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार करने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अधिकार पर अतिक्रमण
दूसरे ज्ञापन में सरपंच संघ ने 4 नवंबर 2025 को जारी एक आदेश पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का कहना है कि उक्त आदेश के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्राम सभाओं के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया है, जबकि पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को स्वतंत्र अधिकार प्राप्त हैं। ज्ञापन में इस आदेश को तत्काल निरस्त करने तथा पंचायत प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है।
सरपंच संघ का कहना है कि पंचायत व्यवस्था को कमजोर करने वाले निर्णय और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ कथित दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।



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