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जो हैं खास, उन्ही को पीएम आवास

 आवास प्लस सर्वे में भ्रष्टाचार का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

रिश्वत लेकर अपात्रों को पात्र बनाने का आरोप, गरीबों का हक छीने जाने की शिकायत


शहडोल/गोहपारू। विकासखंड गोहपारू की ग्राम पंचायत चुहिरी में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (आवास प्लस) के सर्वे एवं सत्यापन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन को दिए गए एक शिकायत आवेदन में सर्वे प्रक्रिया में कथित अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं रिश्वत लेकर अपात्र व्यक्तियों को पात्र घोषित किए जाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आवास प्लस योजना के सर्वे एवं सत्यापन का कार्य आजीविका मिशन के ब्लॉक समन्वयक पद्मेश तिवारी को सौंपा गया था। आवेदन के अनुसार पात्रता के निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से आर्थिक लेनदेन के आधार पर ऐसे लोगों को भी योजना के लिए पात्र घोषित कर दिया गया, जिनके पास पहले से पक्का मकान, पर्याप्त कृषि भूमि, ट्रैक्टर तथा अन्य संसाधन उपलब्ध हैं।

शिकायतकर्ता ने उदाहरण स्वरूप कई हितग्राहियों के नामों का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि कुछ लोगों के पास 12 एकड़ तक कृषि भूमि, ट्रैक्टर एवं अन्य संसाधन होने के बावजूद उन्हें पात्र सूची में शामिल किया गया। वहीं कुछ परिवारों को पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद भी दोबारा पात्र घोषित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक गांव के स्थायी निवासी होने के कारण सभी हितग्राहियों की वास्तविक स्थिति से भली-भांति परिचित थे, इसके बावजूद सर्वे के दौरान किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इस कथित अनियमितता में पंचायत स्तर के जिम्मेदार पदाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि सूची में उनके रिश्तेदारों के नाम भी शामिल बताए गए हैं।

शिकायत में मांग की गई है कि ग्राम पंचायत चुहिरी की आवास प्लस योजना की संपूर्ण सूची एवं सर्वे का स्वतंत्र जांच दल से पुनः सत्यापन कराया जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित सर्वे अधिकारी को कार्य से अलग किया जाए तथा आरोप सत्य पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसके अलावा अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची से हटाकर वास्तविक गरीब एवं पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिए जाने की मांग भी की गई है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराता है और सामने आए आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।

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