धनपुरी नगर पालिका का जाति प्रमाणपत्र विवाद
अध्यक्ष रविंदर कौर छाबड़ा से जुड़े विवाद में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
शहडोल कलेक्टर 90 दिन में जांच कर देंगे आदेश
माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने दिया निर्देश
शिकायतकर्ता आनंद कचेर और नगर पालिका अध्यक्ष दोनों पक्षों को मिलेगा सुनवाई का अवसर
मचेगा भारी राजनीतिक हड़कंप
( अनिल द्विवेदी 7000295641)
शहडोल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर से एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक गलियारों में भूचाल लाने वाला बड़ा फैसला सामने आया है। माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने रिट याचिका क्रमांक 23714/2026 पर सुनवाई करते हुए शहडोल जिला कलेक्टर को एक कड़ा और समयबद्ध वैधानिक निर्देश जारी किया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि धनपुरी नगर पालिका परिषद की वर्तमान अध्यक्ष श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा के विवादित जाति प्रमाणपत्र की वैधता के संबंध में याचिकाकर्ता आनंद कचेर एवं अन्य द्वारा पूर्व में प्रस्तुत की गई शिकायत पर आगामी 90 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को सुनवाई का निष्पक्ष अवसर प्रदान करते हुए एक विधि सम्मत व तर्कसंगत (Speaking Order) आदेश पारित किया जाए।
क्या है पूरा मामला ?
मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो यह पूरा विवाद वर्ष 2018 में जारी किए गए एक संदिग्ध जाति प्रमाणपत्र से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता आनंद कचेर एवं अन्य की ओर से उच्च न्यायालय में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश कुमार मिश्रा ने पुरजोर तरीके से दलील दी कि प्रतिवादी क्रमांक 5, श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा (अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद धनपुरी) द्वारा कथित रूप से वास्तविक तथ्यों को छुपाकर और भ्रामक जानकारियों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र क्रमांक RS/460/0118/15/2018 (दिनांक 21.08.2018) हासिल किया गया था। इस कथित हेराफेरी के खिलाफ आनंद कचेर ने गत 24 मार्च 2026 को शहडोल जिला प्रशासन एवं कलेक्टर के समक्ष एक विस्तृत शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसमें इस पूरे मामले को राज्य स्तरीय छानबीन समिति को सौंपने और मूल रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की गई थी। परंतु, लंबे समय तक प्रशासनिक उदासीनता के कारण जब जिला स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो याचिकाकर्ताओं को न्याय की गुहार लेकर हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
90 दिन की डेडलाइन
शहडोल कलेक्टर को इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दिन से ठीक 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से अंतिम निर्णय लेना होगा। प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत का पालन करते हुए जांच प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता आनंद कचेर और अनावेदक श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा दोनों को अपनी बात और साक्ष्य रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टर का निर्णय पूरी तरह साक्ष्यों के बारीक और तार्किक विश्लेषण पर आधारित होना चाहिए।
कोर्ट रूम का घटनाक्रम:
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान अनावेदक श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा की ओर से अधिवक्ता गौरव माहेश्वरी और शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता दर्शन सोनी उपस्थित हुए। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि जिला प्रशासन इस अत्यंत संवेदनशील और वैधानिक मामले को ठंडे बस्ते में न डाले, बल्कि इस पर त्वरित निर्णय ले। कोर्ट ने इस मांग को पूरी तरह न्यायसंगत मानते हुए गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए, सीधे जिला कलेक्टर शहडोल को जवाबदेह बनाते हुए समय सीमा निर्धारित कर दी है।
कुर्सी पर मंडराया संकट
इस ऐतिहासिक आदेश के बाद अब शहडोल सहित धनपुरी के राजनीतिक मंच पर भारी दबाव आ गया है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 90 दिनों की इस समयबद्ध जांच में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा का वह जाति प्रमाणपत्र अवैध या कूटरचित पाया जाता है, तो उनके खिलाफ न केवल धोखाधड़ी की वैधानिक कार्रवाई होगी, बल्कि उनके अध्यक्ष पद पर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। अब देखना यह है कि हाई कोर्ट के इस तीखे रुख के बाद शहडोल कलेक्टर का कार्यालय इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच को कितनी निष्पक्षता और तत्परता से आगे बढ़ाता है।

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