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सत्यम और सुन्दरम से दूर शिवम

 निष्पक्षता, कर्मठता का दंभ, दरक रहा प्रशासनिक स्तंभ

चिंदी चोरों का सहारा, प्रताड़ित हो रहा सर्वहारा

मिट्टी का शेर, अवैध वसूली गैंग के आगे हुआ ढेर

IAS बोले तो Internal administrative surrender

" सत्यम यानी अपने मूल कर्तव्य अथवा पदीय दायित्व का जिम्मेदारी पूर्वक निर्वहन और सुंदरम यानी अपने कार्य कुशलता के दम पर लोगों की समस्याओं का समय पर यथोचित समाधान तथा विकास, इन दोनों ही तत्वों से कोसों दूर खड़े नजर आ रहे हैं शहडोल जिला पंचायत के मुख्य कर्ताधर्ता शिवम। सीईओ जिला पंचायत के रूप में उनके द्वारा जहां एक ओर आए दिन किसी भी अधिकारी कर्मचारी का वेतन काटने का आदेश जारी किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर ऐसे कर्मचारी के वेतन का भुगतान भी हो रहा है जो 6 माह पूर्व सेवा समाप्ति का दंश झेल चुका है। ऐसा अधिकारी कहां मिलेगा जो अपने नाम पर सरेआम हो रही अवैध वसूली और आर्थिक अपराध होने पर भी स्वयं कोई कार्रवाई करना तो दूर अपने चहेते आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का साहस भी न जुटा पाए और उन्ही कथित आरोपियों के इशारों पर थिरकता नजर आए। ऐसी ही गतिविधियों के मद्देनजर लोगों के बीच व्याप्त चर्चाओं में - IAS बोले तो Internal administrative surrender जैसा वाक्यांश सुर्खियों में है। "



शहडोल। जिला पंचायत कार्यालय एक ऐसे अजायबघर के रूप में विकसित होता जा रहा है जहां भ्रष्टाचार और अनियमिताओं की दुर्लभ किस्में देखने को मिल सकती हैं। प्रशासनिक कसावट और निर्माण तथा विकास कार्यों में गति लाने के नाम पर सख्ती का दंभ भरते हुए जिला पंचायत के सीईओ द्वारा अब तक अधिकांश अधिकारी कर्मचारियों को अवैतनिक करने का आदेश जारी कर अब तक लाखों रुपए की कटौती कर्मचारियों के वेतन से की जा चुकी है। प्रशासनिक कसावट के नजरिये से उनका यह निर्णय भले ही उचित हो लेकिन कार्यालय में कब, कौन से कांड हो रहे हैं, कौन उनके नाम से मलाई छान रहा है और कौन है जो उनके नाम पर ग्राम पंचायतो के सरपंचों सचिवों और उपयंत्रियों तक से अवैध वसूली कर अपनी तोंद मोटी कर रहा है इन पर सीईओ की नजर ही नहीं पड़ती है। शायद यही वजह है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऐसे आस्तीन के सांपों पर कार्यवाही के बजाय उनकी ही धुन पर मगन नजर आ रहे हैं।

दिल के सच्चे, कान के कच्चे

जिला पंचायत कार्यालय परिषद में यह चर्चा आम है की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एक स्वच्छ और ईमानदार के अधिकारी हैं उन पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है यह शहडोल जिला पंचायत के लिए सौभाग्य की बात है लेकिन परिसर में यह चर्चा भी आम है कि सीईओ नए अधिकारी हैं, अनुभव ज्यादा नहीं है, दिल के सच्चे लेकिन कान के कच्चे भी हैं और जिला पंचायत में एक लंबे समय से सक्रिय तिकड़ी उनका भरपूर लाभ उठा रही है। जानकार सूत्रों की माने तो जिला पंचायत कार्यालय में इन दिनों वही हो रहा है जो तिकड़ी चाहती या करवाती है। खुद मलाईदार पदों पर कब्जा जमाए बैठे इन पांचवें दर्जे के कर्मचारियों की गुटबंदी ने जिला पंचायत की फिजा को बुरी तरह से बर्बाद किया है और इस कथित गुट या टिकड़ी को मुखिया का संरक्षण मिल जाना जिले के लिए काफी अहितकर साबित हो रहा है।

अवैध वसूली का मामला

गौरतलब है कि  कुछ महीने पूर्व एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें जिला पंचायत सीईओ के नाम पर जिले भर के तमाम सरपंचों सचिवों को फोन कर उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था, उनसे अवैध धन की मांग कर वसूली भी की गई जिसका मामला जिला पंचायत कार्यालय तक पहुंचा और कई दिनों तक यह मामला सुर्खियों में बना रहा। सूत्रों की माने तो इस मामले की तह तक जाने के लिए कार्यालय के भीतर ही भीतर छानबीन हुई थी, मोबाइल फोन ट्रेस किया गया और उक्त फर्जी सीईओ के काल से प्राप्त होने वाली अवैध आय को प्राप्त करने वालों का भी कथित तौर पर पता चल गया लेकिन देखते ही देखते पूरा का पूरा मामला गधे की सींग की भांति गायब भी हो गया। जबकि इस मामले के सुर्खी में रहने के दौरान यह प्रचारित किया गया कि जिला पंचायत के सीईओ शिवम प्रजापति स्वयं इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने वाले हैं क्योंकि वसूली उनके नाम से की गई थी। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े आर्थिक घोटाले के मामले में सीईओ जिला पंचायत ने चुप्पी क्यों साध ली? सवाल यह भी उठता है कि फर्जी सीईओ के काल के आधार पर किन-किन मोबाइल नंबरों पर अवैध वसूली की राशि आई इसका खुलासा क्यों नहीं हुआ कहीं ऐसा तो नहीं कि इस मामले में भी जिला पंचायत की तिकड़ी का ही हाथ था और अपनत्व तथा कर्मचारी अहित से बचने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने अपने कदम वापस ले लिए?

मुर्दे की हाजिरी और भुगतान


हालांकि जिला पंचायत कार्यालय में एक से एक कांड होते रहे हैं जो लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बने रहे हैं। इन्हीं में से एक मामला हाल ही में सामने आया जिसमें जिला पंचायत कार्यालय में आउटसोर्स से कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर को सेवा समाप्त कर दिए जाने के 6 महीने बाद भी बाकायदा वेतन का भुगतान किया जा रहा है। उक्त आउटसोर्स कर्मचारी की किसने सेवा समाप्त की, कौन उसकी फर्जी हाजिरी लग रहा है, कौन इस आर्थिक अनियमितता को संरक्षण दे रहा है, इस बात की जांच और सख्त कार्यवाही होना आवश्यक है।  क्योंकि निकल गए कर्मचारी की हाजिरी भेज कर उसका वेतन निकालना यानी मुर्दे की हाजिरी भरकर उसकी मजदूरी की राशि डकार ने जैसा गंभीर अपराध माना जा सकता है जिस पर कार्यवाही तो बनती है।

सेवा समाप्ति भी- फर्जी हाजिरी भी

जानकार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मार्च के महीने में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं उपायुक्त विकास मुद्रिका सिंह द्वारा जारी आदेश के तहत आउटसोर्स कर्मचारी की सेवा समाप्त की गई और मजे की बात ही है कि उन्हें मुद्रिका सिंह के हस्ताक्षर से सितंबर माह में सेवा समाप्त आउटसोर्स कर्मचारी की हाजिरी भी संबंधित कंपनी को भेजी गई है। तात्पर्य यह की पिछले 6 महीने से निरंतर फर्जी हाजिरी भरकर कार्य से पृथक किये जा चुके डाटा एंट्री ऑपरेटर की तनख्वाह निकाली जा रही है। वह किसकी जेब में जा रही है यह तो पता नहीं लेकिन इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जिला पंचायत शहडोल में आर्थिक अनियमितताओं की बाढ़ आई हुई है और इस बाढ़ को बढ़ावा देने वाला चाहे छोटा कर्मचारी हो या बड़ा उनके विरुद्ध कार्यवाही तो होनी ही चाहिए।

चादर ओढकर मलाई

गौरतलब है कि शासन द्वारा कर्मचारियों की चार श्रेणियां निर्धारित की गई है। चतुर्थ श्रेणी में भृत्य और चौकीदार आते हैं। संविदा आपरेटरों को पांचवीं श्रेणी में माना जा सकता है और यही पांचवीं श्रेणी के कर्मचारी जिला पंचायत में राज कर रहे हैं। तमाम वरिष्ठ और स्थाई कर्मचारियों को दरकिनार कर एक संविदा ऑपरेटर को स्टेनो जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है जबकि एक अन्य ऑपरेटर को उसके मूल कार्य से हटा कर जिला पंचायत कार्यालय का भंडार ही खजाना सौंप दिया गया है और वह इस भंडार में सामग्री खरीदी, खरीदी गई सामग्री के व्यवस्थापन और आर्थिक व्यय के नाम पर लाखों में खेलता नजर आ रहा है। तिकड़ी का कप्तान भी कमजोर नहीं है। यूँ तो वह संविदा (मनरेगा ) लेखाधिकारी है लेकिन साहब की कृपा बरसती है इसलिए कप्तानी का फुल मजा ले रहा है। कुल मिलकर तिकड़ी चादर ओढ़ कर मलाई छान रही है और जिला पंचायत के अधिकारी कर्मचारी टुकुर-टुकुर उनका मुंह निहारत नजर आ रहे हैं।

चिंदी चोरों का सहारा

सूत्रों की माने तो जिला पंचायत के मुखिया चिंदी चोरों की तिगड़ी की सलाह पर ही हर निर्णय ले रहे हैं इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो कार्यालय के अधिकारी कर्मचारी ही बता सकते हैं लेकिन यदि बाद में थोड़ी भी सच्चाई है तो अधिकारी की प्रशासनिक दक्षता और छवि के लिए यह घातक साबित हो सकती है अभी भी समय है हालात बदले जा सकते हैं और इसका लाभ न सिर्फ जिले के जिला पंचायत के अधिकारी कर्मचारी बल्कि पूरे जिले की ग्रामीण जनता को मिल सकता है इसलिए जिले के मुखिया जिनके पास ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी है उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए ऐसा जिले के लोगों का मानना है।

{ इस समाचार को शिकायत या दुर्भावना नहीं अपितु सुझाव के रूप में ग्रहण करें}

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