एक ही बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य का, दो सचिवों ने किया दो बार भुगतान
चारदीवारी बनी नहीं दो बार निकल गई रकम
भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय की कुदृष्टि होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
शासकीय धनराशि का खुले आम चल रहा दुरुपयोग
अन्य सामग्री खरीदी में सारे नियम कायदे ध्वस्त
फर्जी बिलों के आधार पर किए गए फर्जी फर्मों को भुगतान
" पहले पुराने सचिव ने पांच लाख रुपये आहरित कर लिए, बाद में दूसरे सचिव की पदस्थापना हुई तो उसने भी आकर पांच लाख रुपये निकाल लिए हालांकि जिस निर्माण कार्य के नाम पर उक्त राशि का आहरण किया गया वह पांचवे वित्त मद से स्वीकृत किया गया था और उसके लिए कुल साढे 6 लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई थी। इतना ही नहीं पंचायत में भ्रष्टाचार का कीर्तिमान रचने वाले सचिव संग्राम ने अन्य सामग्री खरीदी के नाम पर भी फर्जी बिल वाउचरों के जरिए तथा कथित फर्जी फर्मों को ₹3 लाख से अधिक की राशि का भुगतान जारी कर दिया गया। कथित तौर पर भाजपा नेता के संरक्षण में चल रहे इस गोरख धंधे के खिलाफ अब कहीं जाकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोला है और कमिश्नर, कलेक्टर तथा जिला पंचायत के सीईओ से शिकायत कर सख्त कार्यवाही की की गई है। "
(अनिल द्विवेदी 7000295641)
शहडोल। जिले की जयसिंहनगर जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदूडोल में निर्माण कार्यों एवं सामग्री खरीदी को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में एक ही बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य के नाम पर दो अलग-अलग सचिवों द्वारा भुगतान किए जाने से शासकीय राशि के दुरुपयोग का प्रमाण सामने आया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर संभाग आयुक्त शहडोल कलेक्टर शहडोल एवं जिला पंचायत सीईओ के साथ ही जनपद पंचायत के सीईओ को शिकायत पत्र सौंपा है।
कैसे हुआ डबल भुगतान
संभाग जिला मुख्यालय में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे जयसिंहनगर जनपद पंचायत जयसिंहनगर के सदस्य पंकज सिंह, पंच द्वय कमलेश पाव, शिवप्ग्रारसाद सिंह तथा ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल को लेकर भुगतान प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एक ही निर्माण कार्य के लिए दो बार भुगतान किया गया। यदि दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों में इसकी पुष्टि होती है तो यह पंचायत की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की वास्तविक लागत, स्वीकृत राशि, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच किए बिना मामले की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती।
भाजपा नेता की भूमिका संदिग्ध
भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय की कथित भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कार्यों में उनकी कुदृष्टि और कथित हस्तक्षेप के कारण गांव के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण, विकास अथवा भुगतान संबंधी कार्य भाजपा मंडल अध्यक्ष की सहमति और अनुमति के बिना सरपंच सचिव नहीं कर पा रहे हैं दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि बेवजह की दखलअंदाजी चरमोत्कर्ष पर है जिससे ग्राम पंचायत तेंदूडोल उबर नहीं पा रहा है।
विस्तृत जांच जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में यदि जनहित के लिए स्वीकृत शासकीय राशि का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो गांव में सड़क, नाली, पेयजल, भवन, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के काम बेहतर ढंग से हो सकते हैं। ऐसे में राशि के कथित दुरुपयोग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच जरूरी है।
अन्य सामग्री खरीदी, कमाई का जरिया
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सामग्री खरीदी में भी नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपित किया गया है कि खरीदी प्रक्रिया में निर्धारित नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया तथा कथित तौर पर ऐसे बिल प्रस्तुत किए गए जिनकी वास्तविकता की जांच आवश्यक है। जानकार सूत्रों की माने तो अन्य सामग्री खरीदी में बिल किसी और का लगा है जबकि भुगतान किसी अन्य फर्म को किया गया है किसने पंचायत को सामग्री आपूर्ति की, किसने बिल प्रस्तुत किया और किस फर्म को पंचायत द्वारा भुगतान किया गया इनका आपस में कोई तालमेल नहीं दिख रहा है। कहीं बिल फर्जी, तो कहीं फर्म फर्जी तो कहीं भुगतान ही फर्जी है। इसके अलावा अन्य सामग्री खरीदी के नाम पर गिट्टी, सीमेंट आदि सामग्री में राशि से व्यय करना दिखाया गया है जबकि ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है।
खंगाले जाएं दस्तावेज
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि फर्जी बिलों के आधार पर कथित फर्जी फर्मों को भुगतान किया गया। यदि ऐसा हुआ है तो संबंधित बिल, फर्म के दस्तावेज, जीएसटी विवरण, बैंक भुगतान, सामग्री प्राप्ति रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और पंचायत के वित्तीय अभिलेखों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
... तब सामने आएगी सच्चाई
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। विशेष रूप से बाउंड्री वॉल निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र, भुगतान वाउचर और बैंक लेनदेन की जांच की जाए। साथ ही सामग्री खरीदी से जुड़े बिलों और संबंधित फर्मों के अस्तित्व की भी जांच हो तभी सच्चाई सामने आएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय धनराशि जनता के विकास के लिए होती है। इसलिए यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या दोहरा भुगतान प्रमाणित होता है तो जिम्मेदार लोगों से राशि की वसूली के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।



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