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ग्रामीण विकास की गाड़ी का पंक्चर पहिया बना उपयंत्री

 सीईओ, एसडीओ और तकनीकी टीम की मेहनत पर फिर रहा पानी

निर्माण कार्यों मे ठेकेदारों के साथ मिल, चला रहा मनमानी 

काम के बजाय कमीशन का कारोबार 

सख्त कार्यवाही यानी अटैचमेंट के आसार 


सीईओ शिवानी जैन और एसडीओ विजेंद्र सिंह के नेतृत्व में विकास पथ पर निरंतर अग्रसर जयसिंहनगर जनपद पंचायत के रथ का एक पहिया पंक्चर हो गया है। जनपद की तकनीकी टीम के सदस्य आशुतोष चतुर्वेदी उपयंत्री की कार्यप्रणाली और तथाकथित ग्रामीण ठेकेदारों से सांठगांठ के कारण उत्पन्न हालात ने विकास की गति को बुरी तरह से प्रभावित किया है। जानकार सूत्रों की मानें तो जनपद के सबसे पुराने और सर्वाधिक ग्राम पंचायतो के प्रभार वाले उक्त उपयंत्री की हरकतों पर जिला पंचायत के अधिकारियो की नजर अब पड़ चुकी है, जो उन्हें सख्त कार्यवाही यानी सेवा समाप्ति या संलग्नीकरण के नतीजे तक पहुंचा सकती है।


शहडोल। जिले के जयसिंहनगर जनपद पंचायत में तकरीबन 13 वर्षों से कार्यरत उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा ग्राम विकास के नाम पर स्थानीय ग्रामीण ठेकेदारों से गठजोड़ कर निर्माण कार्यों को अनियमितता की भेंट चढाने और भ्रष्टाचार को प्रश्रय दिए जाने को लेकर सुर्खियों में हैं। आशुतोष चतुर्वेदी नामक उक्त उपयंत्री का अलग-अलग सेक्टरों में भले ही ट्रांसफर हुआ हो लेकिन जयसिंहनगर जनपद पंचायत से बाहर उन्हें कोई नहीं भेज सका। तीन पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान कई उप यंत्रियों के स्थानांतरण इस जनपद से उस जनपद, इस जिले से उस जिले में हुए लेकिन मजाल क्या है कि कोई उपन्यत्री आशुतोष चतुर्वेदी को हिला भी पाया हो। 


सूत्रों की माने तो जोड़-तोड़ और जुगाड़ में माहिर इस उपयंत्री ने अब तक जयसिंहनगर जनपद में आने वाले सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अपने मोह जल में फसाने में सफलता अर्जित की है लेकिन मौजूदा सीईओ शिवानी जैन पर उनका असर नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि सीईओ शिवानी जैन ने इंजीनियर आशुतोष चतुर्वेदी के कर्मों की जांच आरंभ कर दी और उपयंत्री की मनमानी के किस्से जिला पंचायत की गलियारों में गूंजने लगे हैं। शादी समारोह में बजने वाले डीजे की भाति गूंज रहे भ्रष्टाचार के किस्सों ने वरिष्ठ अधिकारियों तक को झकझोरा है और अब माना यह जा रहा है कि मदमस्त उपयंत्री के झनझनाने का भी समय आ ही चुका है।

लपरी में भ्रष्टाचार की चकरी 

प्राप्त जानकारी के अनुसार उपयंत्री आशुतोष के प्रभार में जितनी भी ग्राम पंचायतें हैं उन सभी में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की नई कहानी गढने का क्रम बदस्तूर जारी है। इन्हीं में से एक ग्राम पंचायत है लपरी। लपरी शहडोल संभाग ही नहीं, शायद मध्य प्रदेश का इकलौता गांव है जहां एक महीने का मेला लगता है। आसपास के ग्रामीणों के साथ ही दूर-दूर से भी लोग यहां मेले का आनंद उठाने आते हैं जिनकी सुख सुविधा का ध्यान रखना और लोगों की आवाजाही एवं अपेक्षाओं के अनुरूप विकास करना ग्राम पंचायत का दायित्व है, जिसमें यह पंचायत पूर्णतः विफल नजर आ रही है। बताया जाता है कि जिस उपयंत्री को तकनीकी मार्गदर्शन देने का दायित्व जिला प्रशासन द्वारा सौंपा गया है वह भेदभाव और मनमानी पूर्ण गतिविधियों में संलिप्त है जिससे विकास कार्य तो प्रभावित हो ही रहे हैं ग्रामीणों में तीव्र असंतोष भी देखा जा रहा है।


मंदिर एक ईंटे को तरसा, मजार में रूपयों की वर्षा 

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत लपरी में उपसरपंच और पंचायत सचिव आपस में चाचा भतीजा हैं, पूरे पंचायत में इन दोनों की ही चलती है और उपयंत्री आशुतोष का इन्हें भरपूर संरक्षण प्राप्त है। ग्राम पंचायत लपरी की इस तिकड़ी ने मनमानी की सारी हदें पार कर दी है जिसे लेकर लपरी ग्राम वासियों में आक्रोश बड़ी तेजी के साथ सुलग रहा है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत लपरी में सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच या चबूतरा निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हुई जिसे एक ही स्थान पर यानी मजार पर बनवाने का कार्य किया जा रहा है क्योंकि उपसरपंच और सचिव एक ही समुदाय के हैं इसलिए उन्होंने समुदाय विशेष के लोगों के लाभ को देखते हुए निर्माण कार्य आरंभ कर दिया, जबकि वास्तव में सामुदायिक भवन की आवश्यकता वहां थी जहां हर साल एक महीने का मेला आयोजित होता है। मेला स्थल के पास ही शिव मंदिर और तालाब है उक्त मंदिर और क्षेत्र के विकास के नाम पर पंचायत को सांप सूंघ जाता है। ग्रामीण मांग करते नहीं थक रहे लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा और न ही एक ईंट रखने को तैयार है वहीं दूसरी ओर पंचायत मजार पर इतनी मेहरबान है कि दो दो निर्माण कार्य एक साथ आरंभ कर ग्रामीण विकास की अवधारणा को ही बदल कर रख दिया है।

बीस मीटर में दो पुलिया 



 शासकीय धनराशि का दुरुपयोग कैसे करना है या उससे अवैध रूप से कैसे अपनी खुद की तिजोरी भरनी है यह ग्राम पंचायत लपरी में जाकर सीखा जा सकता है, जहां ग्राम पंचायत के कर्ताधर्ताओं ने अपने महान तकनीकी विशेषज्ञ उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में मात्र 20 मीटर के एरिया में दो पुलिया का निर्माण कर शासकीय धनराशि की होली खेली है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि उक्त दोनों पुलिया मुख्य मार्ग के बगल में ऐसे स्थान पर आमने-सामने बनाई गई हैं जहां आने-जाने का कोई रास्ता ही नहीं है उक्त पुलिया बनाने का क्या औचित्य है यह ग्रामीणों की समझ से पड़े तो है ही यदि उच्च अधिकारी मौके पर जाकर देखें तो शायद उनकी भी बुद्धि काम करना बंद कर सकती है।


 शौच को नहीं पानी, लाखों की कहानी


 लपरी ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, उपसरपंच द्वारा जिस प्रकार मनमानी पूर्ण कार्य कर ग्रामीण विकास का उपक्रम किया जा रहा है वह न सिर्फ हास्यास्पद बल्कि लोगों के आक्रोश का कारण भी बन रहा है। उपसरपंच और सचिव द्वारा उपयंत्री के मार्गदर्शन में शिव मंदिर तालाब में घाट का निर्माण कराया गया है। यह वह तालाब है जहां पहले से घाट निर्मित है और आलम यह है कि उक्त तालाब में इतना पानी भी नहीं है कि लोग नित्य क्रिया से भी फारिग हो सकें। ऐसी हालत में घाट का निर्माण कराए जाने से ग्रामीणों को यह लगने लगा है कि उक्त कार्य सिर्फ अपनी खुद की कमाई के लिए कराया गया है, ग्रामीणों की सुख सुविधा और विकास से उसका कोई सरोकार नहीं है।

 हर कहीं भ्रष्टाचार

 जयसिंहनगर जनपद पंचायत क्षेत्र की पंचायतो और उनमें चल रहे निर्माण एवं विकास कार्य की जानकारी रखने वाले सूत्रों की बातों पर यदि विश्वास किया जाए तो तकरीबन 14 वर्ष से जयसिंहनगर जनपद पंचायत में जमे उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी के प्रभार में जितनी भी ग्राम पंचायतें हैं उन सब में ठेकेदारी और ठेकेदारों की मनमानी चरमोत्कर्ष पर है। सरपंच सचिव को दबाव में लेकर ठेकेदारों के साथ विकास के लिए स्वीकृत धन के दुरुपयोग को अपना परम धर्म मानने वाले उपयंत्री की गतिविधियों के संबंध में कई बार शिकायतें भी दर्ज कराई गईं लेकिन कोई कारगर कार्यवाही नहीं हो सकी। जितने भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैसिंहनगर जनपद में आए तकरीबन सभी को उपयंत्री ने अपने शीशे में उतार लिया लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। जब से जनपद सीईओ शिवानी जैन में पदभार संभाला है उपयंत्री के कार्यों की निगरानी शुरू हो चुकी है। इतना ही नहीं शिकायतें जिला पंचायत के सीईओ तक भी पहुंची हैं और यदि सूत्रों की जानकारी सही है तो शीघ्र ही उपयंत्री आशुतोष चतुर्वेदी को अपनी करतूतों का फल भुगतना पड़ सकता है।













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