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आरकेटीसी : करिंदे ही कर रहे ऐसी...

 अमलाई ओसीएम मे मजदूरी घोटाला 

 एसईसीएल मैनेजमेंट और ठेका कंपनी के साथ ही मजदूरों के साथ धोखाधड़ी का दौर जारी 

" एसईसीएल द्वारा अमलाई ओसीएम में ओबी मिट्टी हटाने का ठेका आरकेटीसी नामक ठेका कंपनी को दिया गया है। छत्तीसगढ़ में काफी प्रतिष्ठित और नामी गिरामी मानी जाने वाली इस कंपनी द्वारा सोहागपुर कोयलांचल के अमलाई ओसीएम में कार्य संचालन की जिम्मेदारी जिन करिंदों को सौंपी गई है वह अपना मूल कर्तव्य भूलकर चधद रूपयों के लालच तथा अनर्गल प्रभाव के चलते न सिर्फ अपनी ही नियोक्ता कंपनी बल्कि सैकड़ो मजदूरों के साथ ही एसईसीएल प्रबंधन को भी सरेआम धोखा देते नजर आ रहे हैं। जिस पर यदि कारगर अंकुश नहीं लगाया गया तो एसईसीएल और आरकेटीसी कंपनी की साख पर तो बट्टा लगेगा ही यदि कोई अनहोनी हो गई तो गरीब मजदूर कहीं के नहीं रह जाएंगे।"


शहडोल। छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों के विभिन्न कोयलांचलों की खदानों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आरकेटीसी कंपनी के कर्ता-धर्ता सोहागपुर कोयलांचल में तमाम नियम, निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुये न सिर्फ अपनी खुद की कंपनी की साख डुबो रहे हैं बल्कि एसईसीएल को अच्छी खासी चपत लगाने के साथ ही कंपनी के अधीनस्थ कार्य करने वाले सैकड़ों मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिये विशिष्ट ख्याति और सम्मान अर्जित इस कंपनी ने सोहागपुर कोयलांचल के अमलाई ओसीएम में कोयला खदान की ओबी मिट्टी हटाने के कार्य हेतु जिन लोगों को तैनात कर रखा है उन तथा कथित करिंदों ने अवैध धनार्जन के लालच में खदान के अंदर जाने वाले मजदूरों की हाजिरी में हेरफेर का खेल खेलना आरंभ कर दिया है। सूत्रों की मानें तो यदि 100 मजदूर खदान के अंदर भेजे जाते हैं तो हाजिरी 50 की ही दर्ज कराई जाती है। इतना ही नहीं जिन मजदूरों को काम पर लगाया गय है उन्हें शासन और एसईसीएल द्वारा जारी ठेका शर्तों में निर्धारित दर पर मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता है।

ठेका कंपनी के अधिकारी-कर्मचारियों ने कतिपय ऐसे लोगों को काम पर लगा रखा है जो पूर्व से ही कई कंपनियों में मजदूरों की सप्लाई का ठेका लेकर न सिर्फ मजदूरों का बल्कि कंपनियों का भी शोषण करते रहे हैं। मजदूरों के इन दलालों द्वारा जिन मजदूरों को काम पर रखवाया जा रहा है उनसे हर महीने मजदूरी की राशि में बतौर कमीशन 5 से 10 हजार रुपये महीने की वसूली की जा रही है।


जानकार सूत्रों का यह भी दावा है कि ठेका कंपनी के उक्त कर्मचारियों और कथित दलालों द्वारा कॉलरी प्रबंधन के अधिकारियों को भी अंधेरे में रखकर तो कभी उन्हें अपने प्रभाव अथवा आर्थिक प्रलोभन में लेकर मजदूरों का शोषण करते हुये आरकेटीसी जैसी नामी गिरामी कंपनी के नाम को भी रसातल में पहुंचाने का कार्य या यूं कहें कि स्थानीय भाषा में कंपनी की ऐसी-तैसी करने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। कंपनी के स्थानीय कर्ता-धर्ताओं के विरुद्ध आरोपों और तथ्यों की फेहरिस्त लंबी है, जिन्हें क्रमवार सार्वजनिक किया जाएगा।

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