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बंद रेलवे सायडिंग फिर चालू कराने का कर रहे जुगाड़

 पीसीबी, एनजीटी के बाद  हाईकोर्ट को धता बताने का प्रयास

प्रशासन को खरीदने का दम भरने वाले अब न्यायालय को भी करना चाहते हैं मुट्ठी में

अधिकारियों को पटाने तिकड़मबाजी का दौर जारी


(अनिल द्विवेदी 7000295641)
" प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी पीसीबी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी के आदेश को धता बताते हुए जिला प्रशासन के कतिपय अधिकारियों व स्थानीय पुलिस को विश्वास में लेकर नियम विरुद्ध तरीके से पाबंदी के बावजूद रेलवे साइडिंग का संचालन एवं कोयले का अवैध कारोबार करने वालों को लगता है कि अब वह उच्च न्यायालय को भी अपने पाले में खींच लेंगे या न्यायपालिका को ही मुट्ठी में कैद करने में सफल हो जाएंगे और हाईकोर्ट की पाबंदी के बावजूद उनका गोरखधंधा चलता रहेगा। शायद यही वजह है कि  रेलवे साइड में अंधाधुंध कमाई करने वाले कोलम्बया  टाइप लोग अब नए सिरे से अधिकारियों पर डोरे डालने में लगे हैं ताकि येन-केन-प्रकारेण वह पुनः अपने अवैध कारोबार को अंजाम देने के लिए रेलवे साइडिंग को चालू करा सकें।"

शहडोल/धनपुरी। जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा अमलाई कोल साइडिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी तो कर दिया गया है लेकिन अमलाई कोल साइडिंग को संचालित करने वाले अभी भी इस प्रयास में जुटे हुए हैं कि किसी तरीके से वह फिर अपनी अमलाई कोल साइडिंग को चालू कर सकें। इसके लिए अमलाई कोल साइडिंग का संचालन करने वाले अपने राजनीतिक रसूख का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी मिली है कि अमलाई कोल साइडिंग का संचालन करने वाले लोग नेताओं के चक्कर काट रहे हैं और हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को भी चुनौती देने के प्रयास में हैं। चर्चा यह है कि अमलाई कोल साइडिंग का संचालन करने वाले मामले को कोर्ट में लटका कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करके कोल साइडिंग फिर शुरू करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

 अधिकारियों का भी संरक्षण 

अमलाई कोल साइडिंग को शुरू से ही जिले के कई अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त रहा है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एमपी पीसीबी द्वारा 20 नवंबर 2020 को जारी क्लोजर ऑर्डर के बावजूद यह अमलाई कोल साइडिंग लगातार चलती रही। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश की अवहेलना करते हुए अमलाई कोल साइडिंग को चलाया जा रहा था, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही थी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश को नहीं मानने की वजह से स्थानीय लोगों को हाई कोर्ट की शरण देनी पड़ी और हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्लोजर ऑर्डर को लागू करने का दबाव अधिकारी को पर बनाया। इसके बावजूद अमलाई कोल साइडिंग को बंद नहीं किया जा रहा था लेकिन एसडीएम और तहसीलदार पर जब दबाव पड़ा अमलाई कोल साइडिंग को बंद कर दिया गया।

लगातार विरोध 

अमलाई कोल साइडिंग को बंद करवाने के लिए पूर्व भी कई बार आसपास के रहवासियों ने आंदोलन किया है। अमलाई कोल साइडिंग के कारण आसपास के रहवासी बीमार पड़ रहे हैं। यहां कोल्डस्ट उड़ने के कारण लोगों को दमे जैसी बीमारियां हो रही हैं। बताया गया है कि अमलाई कोल साइडिंग चलने वाले निर्धारित नियमों का भी पालन नहीं कर रहे थे जिसकी वजह से कोल्डस्ट के नुकसान से लोगों को बचाने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ। यही कारण है कि अमलाई कोल साइडिंग को बंद करवाने के लिए पहले भी आसपास के लोगों ने खासतौर से महिलाओं ने कई बार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था।

 तो क्या फिर चालू हो जाएगी अमलाई कोल साइडिंग

 जिस तरह की साजिश रची जा रही है और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है उसे लेकर आसपास के लोगों में यह चर्चा बनी हुई है कि कहीं फिर से अमलाई कोल साइडिंग चालू ना हो जाए। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन को आगाह किया है कि अगर किसी तरह की साजिश कर अमलाई कोल साइडिंग फिर से शुरू की गई तो स्थानीय लोग एक बार फिर आंदोलन के लिए विवश हो जाएंगे। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए और यहां दोबारा अमलाई कोल साइडिंग शुरू न होने दी जाए।

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