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ज्वालामुखी माई के दर पर वर्चस्व की लड़ाई

 धनपुरी में धर्म और समाज सेवा के नाम पर गुटीय संघर्ष के आसार

 प्रशासकीय संरक्षण में ट्रस्ट बनना जरूरी


शहडोल/धनपुरी (ब्लिट्ज टुडे)। नगर के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर व धार्मिक आस्था के केंद्र ज्वालामुखी मंदिर की व्यवस्था और देखरेख को लेकर गुटीय संघर्ष के आसार बनने लगे हैं। यूं तो यह मंदिर पूजा, अर्चना और आस्था का केंद्र है लेकिन अपना वर्चस्व कायम रखकर लोगों के समक्ष अपनी बेहतर छवि प्रस्तुत करने की होड़ में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का दौर दौरा जारी है जो कभी भी अप्रिय स्थिति को जन्म दे सकता है, ऐसे हालात में यह आवश्यक है कि जिला प्रशासन इस धार्मिक आस्था के केंद्र की व्यवस्था और निगरानी के लिए एक न्यास का गठन करें जिससे तमाम तरह के विवादों को निर्मूल किया जा सके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोयला नगरी धनपुरी के ज्वालामुखी मंदिर के कथित हितैषियों के बीच आपसी मनमुटाव एवं आरोप-प्रत्यारोप लगाया जाना कोई नई बात नहीं है, पिछले काफी समय से यह सब चलता रहा है लेकिन अब स्थितियां बड़ी तेजी के साथ बदल रही हैं जो विषम परिस्थितियों को जन्म देने को आतुर नजर आ रही हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर्व के समय से लेकर अब तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर बड़ी तेजी के साथ बढ़ा है जिसे देखते हुए लोगों के मन में यह आशंका घर करने लगी है कि अगर यही हालात रहे तो वर्षों से जन आस्था का केंद्र रहा मां ज्वालामुखी का मंदिर विवादों का केंद्र बनकर रह जाएगा और इसके गौरव पूर्ण इतिहास पर कालिख लग सकती है जो किसी भी दृष्टि में उचित नहीं है।

हो सकता है विकास

शासन द्वारा तमाम ऐतिहासिक पुरातात्विक मंदिरों की व्यवस्था एवं देखरेख के लिए पुरातत्व विभाग के सहयोग से व्यवस्थापक अथवा केयर टेकर की नियुक्ति की जाती रही है इसके अलावा विभिन्न धार्मिक स्थल या सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा व देखरेख के लिए न्यासों के गठन का भी प्रावधान किया गया है जिसके तहत जिले के कई मंदिर व धार्मिक स्थल न्यासों के माध्यम से संचालित संधारित किए जा रहे हैं यदि ऐसी ही व्यवस्था ज्वालामुखी मंदिर में प्रशासन द्वारा कर दी जाए तो न सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई समाप्त हो सकती है बल्कि धार्मिक आस्था के केंद्र ज्वालामुखी मंदिर के चौमुखी विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।

मंदिर न बने विवाद का केन्द्र 

धनपुरी नगर वासियों के समक्ष हाल ही में कुछ ऐसी बातें आई हैं जिनमें उभय पक्ष के लोगों द्वारा एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए गए हैं इन आरोपों में कितनी सत्यता है यह तो जांच का विषय है लेकिन धर्म और आस्था के इस परिसर को विवादों से गंदा करना किस हद तक न्यायोचित है यह आम आदमी की समझ से परे है। वास्तव में देखा जाए तो दोनों ही पक्ष के लोग मां ज्वालामुखी और उनके मंदिर की सेवा सुरक्षा और समुचित व्यवस्था के प्रति चिंतित और समर्पित हैं विचारों में कुछ मतभेद हो सकता है जिन्हें दूर करके सभी लोगों को मिलकर धार्मिक आस्था के केंद्र को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए जो नहीं हो रहा है ऐसे हालात में प्रशासकीय हस्तक्षेप और समुचित प्रबंधन नितांत आवश्यक हो गया है।

ट्रस्ट का हो गठन

धनपुरी नगर वासियों ने जिले की जनप्रिय कलेक्टर एवं अनुविभागीय दंडाधिकारी का ज्वालामुखी मंदिर धनपुरी को लेकर उठ रहे विवादों और आशंकाओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए ज्वालामुखी मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रशासकीय निगरानी में कराए जाने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद ना होने पाए।

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